प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन से जुड़े महत्वपूर्ण मामले स्पेशल अपील संख्या 398/2026 (सौरभ सिंह एवं 6 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य) पर आज इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ में सुनवाई प्रस्तावित है। इस मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं माननीय न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की पीठ के समक्ष होनी है।
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
पिछली सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने अपने पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए निर्देश दिया था कि सरप्लस शिक्षकों की सूची लखनऊ खंडपीठ द्वारा पुष्कर सिंह चंदेल एवं अन्य मामले में दिए गए निर्णय के अनुरूप तैयार की जाए। साथ ही सूची को अधिक पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया था।
आज की सुनवाई में क्या हो सकता है?
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संभावना है कि राज्य सरकार सरप्लस शिक्षकों की संशोधित सूची न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है। न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सूची में प्रत्येक सरप्लस शिक्षक के संबंध में संबंधित विद्यालय की शिक्षक संख्या और छात्र संख्या का स्पष्ट विवरण होना चाहिए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
कनिष्ठ शिक्षकों को लेकर क्या स्थिति है?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फिलहाल इस प्रकरण में कनिष्ठ शिक्षकों के समायोजन की संभावना कम मानी जा रही है। हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश पर ही निर्भर करेगा।
याचिकाकर्ताओं की संभावित दलील
संभावना है कि याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे यह तर्क रखें कि यदि किसी विद्यालय में प्रधानाध्यापक को भी शिक्षक संख्या में शामिल करने पर निर्धारित मानक से अधिक शिक्षक हो जाते हैं, तो ऐसे प्रधानाध्यापक को भी सरप्लस मानते हुए समायोजन की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।
प्रधानाध्यापकों की ओर से संभावित पक्ष
प्रधानाध्यापकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा द्वारा सीमा जायसवाल प्रकरण में लखनऊ खंडपीठ के अंतरिम आदेश का हवाला देते हुए यह दलील रखी जा सकती है कि केवल छात्र संख्या के आधार पर किसी प्रधानाध्यापक को सरप्लस घोषित नहीं किया जा सकता।
वरिष्ठ शिक्षकों का पक्ष
अब तक वरिष्ठ शिक्षकों की ओर से इस मामले में कोई अलग प्रार्थना-पत्र न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया था। यदि आज कोई आवेदन दाखिल होता है, तो न्यायालय उनके पक्ष पर भी विचार कर सकता है।
27 हजार शिक्षकों की सूची पर पहले उठे थे सवाल
इससे पहले बेसिक शिक्षा विभाग लगभग 27 हजार सरप्लस शिक्षकों की सूची लेकर न्यायालय पहुंचा था। हालांकि न्यायालय ने सूची में पारदर्शिता के अभाव पर आपत्ति जताते हुए निर्देश दिया कि प्रत्येक सरप्लस शिक्षक के साथ संबंधित विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों और विद्यार्थियों की संख्या का पूरा विवरण भी प्रस्तुत किया जाए।
अगली सुनवाई कब?
मामले में अगली सुनवाई सोमवार को होने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि अंतिम तिथि और आगे की कार्यवाही न्यायालय के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।
महत्वपूर्ण सूचना
यह समाचार न्यायालय में प्रस्तावित सुनवाई, उपलब्ध सूचनाओं और संभावित कानूनी दलीलों पर आधारित है। अंतिम स्थिति केवल इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।
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