नई दिल्ली। यूपी में मुख्य सचिव या जिलाधिकारियों जैसे शीर्ष नौकरशाहों की पत्नियों को अलग-अलग सहकारी सोसायटियों में पदेन नियुक्ति देने को औपनिवेशिक सोच बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से संबंधित नियमों में संशोधन करने का निर्देश दिया।
जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने यूपी सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज के उस तर्क को नहीं माना कि राज्य सरकार इन सोसायटियों की ओर से प्रतिरोध का सामना कर रही है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, उन्हें औपनिवेशिक सोच से बाहर आने की
जरूरत है। सरकार को इन सोसायटियों के लिए आदर्श नियम बनाना चाहिए। पीठ ने कहा, ऐसी सोसायटियां जो सरकार से लाभ लेती हैं, वे सरकार के आदर्श नियमों, उपनियमों व निर्देशों को मानने के लिए बाध्य हैं।
बुलंदशहर जिला महिला समिति से जुड़े मामले में पीठ ने कहा, संशोधित प्रावधानों में सुनिश्चित करें कि प्रशासनिक अधिकारियों की पत्नी या परिवार का सदस्य होने के कारण स्वतः किसी पद को संभालने का मौका न मिले। जो भी सोसायटी इन नियमों को तोड़े, उसकी वैधता खत्म करने का प्रावधान किया जाए। ब्यूरो
Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA
.jpg)




