गोंडा। एक सरकारी अधिकारी को 19 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रख 88.60 लाख रुपये ठग लिए गए। वहीं, एक चिकित्सक से साइबर अपराधियों ने 13.53 लाख रुपये अलग-अलग खातों में जमा करा लिए।
पुलिस के अनुसार अधिकारी के पास 15 जनवरी को अनजान नंबर से फोन आया। बताया गया कि आपका सिम दिल्ली से खरीदा गया है। इस नंबर से लोगों से पैसे मांगे जा रहे हैं। अनैतिक वीडियो व एमएमएस बनाए जा रहे हैं। अधिकारी ने सिम दिल्ली से ही लिया था, इससे वह फोन करने वाले के झांसे में आ गए।
फोन करने वाले ने कहा कि कॉल द्वारिकापुरी पुलिस स्टेशन नई दिल्ली से
कनेक्ट की जा रही है। इसके बाद तथाकथित आईपीएस अधिकारी से उनकी बात कराई, जिसने कहा कि अशोक गुप्ता ने नई दिल्ली में अपना बैंक खाता खोला था। खाते में मनी लॉन्ड्रिंग, स्मगलिंग, चोरी व अवैध कार्यों के सिलसिले में 68 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। इसमें आपको कमीशन देने की बात सामने आई है। मामलों में 57 मुकदमे दर्ज होने की बात कहते हुए एक अन्य आईपीएस अधिकारी
को जांच अधिकारी नामित करने की जानकारी दी। इसके बाद अधिकारी को 15 जनवरी से 2 फरवरी तक डिजिटल अरेस्ट रखकर अलग-अलग खातों में 88.60 लाख रुपये जमा करा लिए। यह रकम उन्होंने मित्रों से उधार, बैंक से कर्ज और जमीन बेचकर जुटाई। बाद में दो लाख रुपये की अतिरिक्त मांग करने पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
वहीं, शहर के एक वरिष्ठ चिकित्सक के पास 16 जनवरी को वीडियो कॉल आई। उनके खाते में अवैध लेनदेन का जिक्र किया गया। गिरफ्तारी की धमकी देते हुए 48 घंटे डिजिटल अरेस्ट रखा। इस बीच उन्होंने डरकर 13.53 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
दोनों मामलों की जांच साइबर सेल कर रही है। डिजिटल अरेस्ट के प्रति जागरूकता जरूरी है। विनीत जायसवाल, एसपी गोंडा
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