मथुरा। स्कूल चलो और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चलाने के बाद भी सरकारी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की संख्या में गिरावट दर्ज हुई है। एक साल में परिषदीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 16,900 कम हो गई है।
शैक्षणिक सत्र 2023-24 में जिले के 1536 परिषदीय विद्यालयों में 1,35,133 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। वर्ष 2024-25 में विद्यार्थियों की नामांकन संख्या 1,18,233 है। बेसिक स्कूलों में कायाकल्प, लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास आदि कार्य किए जा रहे हैं, इसके बाद भी अभिभावक अपने बच्चों को परिषदीय विद्यालय में पढ़ाने में संकोच कर रहे हैं। विद्यार्थियों की संख्या कम होने पर शिक्षक प्रवेश के दौरान बच्चों का आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र आदि न होने का कारण बता रहे हैं। हर सत्र में औसतन 10 हजार बच्चों का पंजीकरण घट रहा है। इसका एक बड़ा कारण शिक्षकों की कमी भी है।
कक्षा एक में प्रवेश के नियम भी बने रोड़ा
केंद्र सरकार की ओर से नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 1 में प्रवेश करने वाले बच्चों की आयु 6 वर्ष तय की गई है। इससे कम आयु वाले बच्चे कक्षा एक में प्रवेश नहीं ले सकते। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार काम प्रवेश होने का यह बड़ा कारण रहा है। नए नियम की वजह से हजारों की संख्या में बच्चे प्रवेश नहीं ले सके।
बेहतर सुविधा भी नहीं कर रही आकर्षित
परिषदीय विद्यालय बीते कुछ सालों में बदले-बदले नजर आ रहे हैं। एक समय था जब बेसिक विद्यालयों की जर्जर हालत देखकर दुख होता था मगर अब यह विद्यालय देखने में बहुत सुंदर लगते हैं। मिशन कायाकल्प के तहत स्कूलों को बेहतर तरीके से तैयार किया जा रहा है। इससे स्कूल देखने में आकर्षित लगते हैं। इसके बाद भी ये स्कूल अभिभावकों को बच्चों का प्रवेश कराने के लिए आकर्षित नहीं कर रहे।
स्कूलों को बेहतर करने का भी काम लगातार चल रहा है। नए शैक्षिक सत्र में हाउसहोल्ड सर्वे, शारदा अभियान में आउट ऑफ स्कूल छात्रों को चिह्नित कर अधिक से अधिक छात्रों को प्रवेश दिलाया जाएगा।
– सुनील दत्त, बीएसए
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