परिषदीय विद्यालयों में अंकों नहीं, समग्र विकास से तय होगी छात्रों की प्रगति – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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जिले के 1570 परिषदीय विद्यालयों में बंटेगा नया समग्र रिपोर्ट कार्ड

संवाद न्यूज एजेंसी

अमेठी सिटी। जिले के 1570 परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत 1.40 लाख विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड का स्वरूप बदला जाएगा। अब रिपोर्ट कार्ड केवल परीक्षा में प्राप्त अंकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, व्यवहार, सहभागिता और समग्र विकास का भी आकलन किया जाएगा।

जुलाई में जिले के सभी परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को पहली बार नया समग्र रिपोर्ट कार्ड वितरित किया जाएगा। नई व्यवस्था में अंकों की लंबी सूची के स्थान पर ग्रेड और स्टार प्रणाली अपनाई जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि केवल परीक्षा के अंक किसी विद्यार्थी की पूरी क्षमता नहीं दर्शाते।

कई बच्चे खेल, कला, रचनात्मक गतिविधियों और व्यावहारिक कौशल में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं। इसी कारण मूल्यांकन का दायरा बढ़ाया गया है।

रिपोर्ट कार्ड में विद्यार्थियों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया दर्ज करने की भी व्यवस्था रहेगी। साथ ही क्यूआर कोड भी जोड़ा जाएगा, जिसे स्कैन कर छात्र की शैक्षिक प्रगति और अन्य जानकारियां देखी जा सकेंगी। इससे रिपोर्ट कार्ड का डिजिटल रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा।


स्काई, माउंटेन और स्ट्रीम से होगी पहचान

नई प्रणाली में विद्यार्थियों को सीखने के स्तर के आधार पर तीन श्रेणियों में रखा जाएगा।

  • स्काई (तीन स्टार) – सर्वोच्च श्रेणी
  • माउंटेन (दो स्टार) – अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी
  • स्ट्रीम (एक स्टार) – अतिरिक्त मार्गदर्शन की आवश्यकता वाले विद्यार्थी

पूरे साल के प्रदर्शन का होगा आकलन

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने बताया कि प्रथम सत्र, अर्द्धवार्षिक, द्वितीय सत्र और वार्षिक परीक्षा के ग्रेड के साथ उपस्थिति, व्यवहार, सहभागिता और सीखने की गति का भी उल्लेख किया जाएगा। इससे पूरे वर्ष की प्रगति एक ही रिपोर्ट कार्ड में दिखाई देगी।


अभिभावकों की राय भी होगी शामिल

रिपोर्ट कार्ड में अभिभावकों और विद्यार्थियों के सुझाव दर्ज करने के लिए अलग स्थान रहेगा। इससे बच्चे की प्रगति का आकलन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था बच्चों को केवल अंकों की प्रतिस्पर्धा तक सीमित रखने के बजाय उनके सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देगी। इससे शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित होगा।

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