**गुरुजी को स्कूल से ज्यादा जेल पसंद है*
*एक जनपद में पढ़ाई लिखाई वाले विभाग में तैनात गुरुजी का काम स्कूल में पढ़ाने का है, लेकिन उनको स्कूल के बच्चे कम जेल ज्यादा पंसद है। यही कारण है की पिछली बार प्रतिनियुक्ति के दौरान वह स्कूल से हट लिए और इस बार भी जब उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त हुई तो स्कूल लौटने के बजाय व दोबारा जेल में तैनाती के लिए शासन से लेकर उच्च अधिकारियों तक जोर लगा दिया। फरवरी में उनकी दोबारा तैनाती हो भी गई, लेकिन हैरानी की बात ये है कि प्रतिनियुक्ति का पत्र विभाग के पास नहीं है। गुरुजी अपनी कार पर पुलिस का स्टीकर लगाकर घूमते रहते हैं।
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