नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केंद्र सरकार के कार्यरत या सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सीजीएचएस सेवा व निश्चित चिकित्सा भत्ता (एफएमए) के बीच विकल्प चुनने का हक है।
हाईकोर्ट का यह फैसला इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए आया है कि प्रत्येक कर्मचारी के निवास अथवा कार्यस्थल के आसपास सीजीएचएस सेवा मिले यह जरूरी नहीं है। ऐसे में वह एफएमए सेवा के तहत अपना या परिवार के किसी सदस्य का उचित इलाज करा सकता है। न्यायमूर्ति नवीन चावला एवं न्यायमूर्ति शैलेंद्र
कौर की पीठ ने इस बाबत टिप्पणी करते हुए सीआरपीएफ के सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल को 21 वर्षों का एफएमए जारी करने का आदेश प्रतिवादियों को दिया।
वर्ष 1998 में वीआरएस ले चुके कर्मचारी ने विभाग से अगस्त 1998 से मार्च 2019 के बीच इलाज पर खर्च रकम की मांग की थी, जिसे विभाग ने खारिज कर दिया था।
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