लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक फैसले में वर्ष 2017 के बाद तैनात पुलिसकर्मियों को समान जिले में दंपति तैनाती न देने के सरकारी आदेश (सर्कुलर) को भेदभावपूर्ण व मनमाना करार दिया है।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर की एकल पीठ ने कहा कि 2017 के पहले और इसके बाद तैनात हुए पुलिसकर्मियों में ऐसा भेदभाव रूख अपनाने का कोई कारण सर्कुलर में नहीं दिया गया है, जो समझ से परे है। सर्कुलर में सिर्फ 2017 से पहले तैनात पुलिसकर्मियों को ही समान जिले में दंपति तैनाती का लाभ देने का प्रावधान है।
इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आजमगढ़ में तैनात याची महिला सिपाही शालिनी की बलरामपुर में नियुक्त उसके शिक्षक पति विक्रम
मिश्र के जिले में तबादले की अर्जी का निस्तारण करने का आदेश अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अवस्थापना) को दिया है। साथ ही कहा कि वह छह सप्ताह में अर्जी को निस्तारित करें। इस आदेश के साथ कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी।
याची की अधिवक्ता प्रगति सिंह ने दलील दी कि महिला कांस्टेबल की सालभर की पुत्री भी है। एक जिले में साथ रहने पर पति-पत्नी पुत्री के देखभाल भी ठीक से कर सकेंगे। तबादले की मांग को लेकर महिला सिपाही ने बीते 14 नवंबर को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अवस्थापना) को प्रत्यावेदन दिया है। इस पर जल्द गौर कर निस्तारित करने की गुजारिश की
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