कहीं पांच बच्चों को तीन, कहीं 72 बच्चों को पढ़ा रहे आठ अध्यापक

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 मिर्जापुर। जिले के परिषदीय विद्यालयों मेंं बच्चों के नामांकन की स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। लाखों रुपये वेतन और मध्याह्न भोजन में खर्च करने के बावजूद बच्चों की संख्या नहीं बढ़ रही। ऐसे में कई स्कूलों में शिक्षकों की संख्या बच्चों के अनुपात में बहुत ज्यादा है। कहीं पांच बच्चों को तीन शिक्षक पढ़ा रहे हैं तो कहीं 72 बच्चों के अनुपात में आठ अध्यापक तैनात हैं।

नगर के सुंदरघाट में स्थित श्रीमती क्षीरद कुमारी जूनियर हाईस्कूल में कार्यरत शिक्षकों की संख्या दो व एक अन्य स्टाफ हैं, यहां पर बच्चों की संख्या भी मात्र पांच ही है। नगर के बीचोबीच स्थित इस विद्यालय में छात्रों के नामांकन की संख्या कई वर्षों से ऐसी ही बताई जा रही है। इसी प्रकार हलिया विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय पुरवा में 30 बच्चे हैं और शिक्षकों की संख्या तीन है। इसी विकास खंड के तिलांव चार में 31 बच्चों पर तीन शिक्षक हें। इसी प्रकार जमालपुर विकास खंड के कंपोजिट विद्यालय रामपुर में आठ शिक्षक कार्यरत हैं। इसके बाद भी इस विद्यालय में मात्र 72 बच्चे पंजीकृत हैं। ऐसे ही राजगढ़ विकास खंड के इमिलिया बंधवा में छह शिक्षक तैनात है और विद्यार्थियों की संख्या मात्र 58 है। कई ऐसे विद्यालय हैं, जहां शिक्षकों की संख्या बच्चों के अनुपात में काफी ज्यादा है।

228 विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या 50 से कम

जिले में कम नामांकन वाले विद्यालयों को चिह्नित किया गया है। जिले में 228 ऐसे विद्यालय हैं, जहां छात्र-छात्राओं की संख्या 50 से कम है। बीएसए ने बताया कि इन सभी विद्यालयों के अध्यापकों को चेतावनी देने के साथ नामांकन बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।

कोट- नए सत्र से नामांकन में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन हर कराया जाएगा। – अनिल कुमार वर्मा, बीएसए

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