नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय कंपनियां वर्ष 2025 में औसत वेतन वृद्धि को 8.8 तक सीमित रख सकती हैं। बीते साल यह वेतन वृद्धि नौ प्रतिशत थी।
डेलॉइट इंडिया के सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि 75 प्रतिशत कंपनियां वेतन वृद्धि को या तो घटाएंगी या पिछले साल के समान स्तर पर बनाए रखेंगी।
रिपोर्ट के मुताबिक शीर्ष प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को औसत प्रदर्शन करने वालों की तुलना में 1.7 गुना वेतन वृद्धि मिल सकती है।
नई दिल्ली। भारतीय कंपनियां वैश्विक व घरेलू चुनौतियों से निपटते हुए कर्मचारियों की पारिश्रमिक लागत से जुड़े बजट को अनुकूलतम बनाने पर ध्यान दे रही हैं। इससे इस साल औसत वेतन वृद्धि 8.8 फीसदी रह सकती है, जो 2024 में 9 फीसदी रही थी।
डेलॉय इंडिया ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में कहा, अधिकांश क्षेत्र वेतन वृद्धि को पिछले वर्ष की तुलना में स्थिर या मामूली रूप से कम रखेंगे। वहीं, उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र में वेतन वृद्धि के बजट में उल्लेखनीय कमी का अनुमान है। 75 फीसदी कंपनियां
वेतन वृद्धि कम कर देंगी या पिछले वर्ष के समान ही रखेंगी। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां प्रमुख प्रतिभाओं को बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। शीर्ष प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी औसत प्रदर्शन करने वालों की तुलना में 1.7 गुना अधिक वेतन वृद्धि की उम्मीद कर सकते हैं, जो पिछले वर्ष
की तुलना में कुछ कम है। डेलॉय इंडिया में साझेदार प्रखर त्रिपाठी ने कहा, कंपनियों की आय वृद्धि सुस्त पड़ने से उनका वेतन बजट दबाव में आ रहा है। नियंत्रित छंटनी और मध्यम महंगाई कंपनियों को प्रतिभा परिणामों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित किए बिना वेतन वृद्धि को अनुकूलित करने में मदद कर रही है। हालांकि उम्मीद है कि कंपनियों का प्रदर्शन और कुशल प्रतिभा पर ध्यान बना रहेगा। यह रिपोर्ट सात क्षेत्रों की 500 से अधिक कंपनियों के प्रमुखों से बातचीत आधारित है
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