दीवाली पर महिलाओं-आंगनबाड़ी सहित कई वर्गों को मिलेगा तोहफा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में प्रदेश कैबिनेट की बैठक शुक्रवार को पूर्वाह्न 11 बजे से लोकभवन में होगी। ढाई दर्जन से अधिक प्रस्तावों को कैबिनेट के विचारार्थ रखा जाएगा। दीपावली से पहले योगी सरकार कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी देकर विभिन्न वर्गों को तोहफा देने जा रही है। दीपावली पर उज्ज्वला योजना में मुफ्त सिलेंडर दिए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल सकती है। भदोही जिले का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर’ किए जाने का भी प्रस्ताव है। कैबिनेट एजेंडे में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायिकाओं को मुफ्त साड़ी दिए जाने और यूपी एआई (आर्टिफिशियल मिशन) की स्थापना का प्रस्ताव भी शामिल है।
इस मिशन में विशेष सचिव स्तर का अधिकारी सीईओ होगा और मिशन सभी सरकारी विभागों में एआई की मदद से नवाचार को बढ़ावा देगा। औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए मॉडल भवन विनियम, 2026 को भी मंजूरी मिलने की संभावना है। 18 शहरों में जीसीसी मॉडल पर एसी ई-बसों का संचालन, निकायों में भवन विकास उपविधि के आधार पर नक्शा पास किए जाने और मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना में कुछ और विकास प्राधिकरणों को धनराशि जारी किए जाने संबंधी प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी।
डे केयर सेंटर के लिए पहली किस्त जारी
लखनऊ। दिव्यांगजनों के कल्याण, विकास और सुगम पुनर्वास की दिशा में योगी सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश सरकार के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग ने चित्रकूट जनपद में बचपन डे केयर सेंटर के भवन निर्माण के लिए प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस परियोजना की कुल लागत 5 करोड़ 62 लाख 82 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसके सापेक्ष वित्तीय वर्ष 2026-27 में निर्माण कार्य शुरू करने के लिए 3 करोड़ रुपये की प्रथम किश्त अवमुक्त कर दी गई है। योगी सरकार लगातार दिव्यांगजनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योजनाओं को धरातल पर उतार रही है। चित्रकूट में बचपन डे केयर सेंटर की स्थापना इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।
दिव्यांग बच्चों के कल्याण, विकास, देखभाल और सुगम पुनर्वास के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं विकसित होने की उम्मीद है।
5.62 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा बचपन डे केयर सेंटर
मूल्यांकन समिति की संस्तुति के आधार पर सेंटर के भवन निर्माण की कुल परियोजना लागत 562.82 लाख रुपये (5.62 करोड़ रुपये से अधिक) निर्धारित की गई है। शासन की ओर से जारी स्वीकृति के अनुसार निर्माण कार्य सक्षम स्तर से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही प्रारंभ किया जाएगा। निर्माण के दौरान निर्धारित गुणवत्ता, मानकों और विशिष्टियों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और कार्यदायी संस्था की होगी।
सभी जरूरी अनापत्तियों के बाद ही शुरू होगा सेंटर का निर्माण
सरकार ने निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी आवश्यक वैधानिक अनापत्तियां और पर्यावरणीय क्लियरेंस प्राप्त करना भी अनिवार्य किया है। इससे परियोजना को निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप पूरा करने में मदद मिलेगी।
इस संबंध में उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव राकेश कुमार यादव ने निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, उत्तर प्रदेश को आधिकारिक स्वीकृति पत्र जारी कर दिया है। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्वीकृत धनराशि का आहरण और व्यय आवश्यकता के अनुसार किश्तों में तथा निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुरूप किया जाएगा।
मोटे अनाज की खरीद से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में एमएसपी पर मोटे अनाज मक्का, बाजरा एवं ज्वार की और धान की क्रय नीति को भी मंजूरी मिल सकती है। आयुष इंटर्न का भत्ता बढ़ाने, मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत मीरजापुर-विंध्याचल और मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण को धनराशि स्वीकृति से जुड़ा प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल है। स्टार्टअप क्रय नीति के जरिए जैम पोर्टल के जरिए सरकारी खरीद में स्टार्टअप को बढ़ावा दिए जाने से जुड़े प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिल सकती है।
सके अलावा राज्य कर, गृह विभाग, राजस्व विभाग, चिकित्सा शिक्षा, पीडब्ल्यूडी सहित कई विभागों के प्रस्ताव शामिल हैं।
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