नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बाद आसमान छूती कच्चे तेल की कीमतों ने भारत के आम आदमी के घरेलू बजट की कमर तोड़ दी है। करोड़ों घरों पर हर माह महंगाई का बोझ दबे पांव इस कदर बढ़ रहा है कि रोजमर्रा के सामान बनाने वाली कंपनियों ने जून के शुरू में ही दाम पांच फीसदी तक बढ़ा दिए हैं।
मार्च के बाद से अब तक रसोई के राशन से लेकर रोजमर्रा की चीजों की औसत कीमतों में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसने मध्यम वर्ग के मासिक बजट को पूरी तरह बेपटरी कर दिया है। कंपनियां कच्चा माल महंगा होने, आपूर्ति एवं ढुलाई लागत बढ़ने और अन्य खर्चों में बढ़ोतरी का हवाला देकर कीमतें बढ़ा रही हैं या पैकिंग का आकार घटा रही हैं। पहले एक लीटर सरसों तेल 180 रुपये का था। अब पैकिंग का आकार 825 ग्राम कर दिया गया है और कीमत 166-175 रुपये के बीच है। पीली सरसों का तेल 170 रुपये लीटर के आसपास था जो अब 220 रुपये तक हो गया है।
ऊर्जा कीमतें भी बढ़ीं
(मार्च के बाद हुई वृद्धि। आंकड़े फीसदी में)
घरेलू सिलेंडर 10.24
कमर्शियल सिलेंडर 76.1
पेट्रोल 7.7
डीजल 8.4
कच्चे माल, ढुलाई लागत बढ़ने का हवाला दे रहीं कंपनियां
रसोई का खर्च करीब एक हजार रुपये तक बढ़ा
अगर किसी परिवार का मासिक घरेलू रसोई खर्च 15 हजार रुपये का था तो हर महीने पांच प्रतिशत की दर से महंगाई बढ़ने से उनका मासिक खर्च 750 रुपये तक बढ़ गया है। इस तरह से मार्च के बाद से देखा जाए तो औसत खर्च में दो हजार से लेकर 2250 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।
मार्च से जून तक दामों में औसत बढ़ोतरी (फीसदी में)
सामान जून मार्च से अब तक
खाद्य तेल 3-5 20-25
साबुन 1-2 05-7
डिटर्जेंट 2-3 10-12
कॉफी 2-3 08-10
हैंडवॉश 3-5 07-10
नमकीन 1-2 10-12
शैंपू 1-3 08-10
दालें 2-3 07-10
महंगाई का साया P21
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