नई दिल्ली। देश की जिला अदालतों में मुकदमों का पहाड़ खड़ा है, लेकिन इन्हें निपटाकर लोगों को त्वरित न्याय देने के लिए अदालतों में जजों की भारी कमी है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश की राजधानी दिल्ली की जिला अदालतों में जजों के 94 पद खाली हैं। जजों के कुल रिक्तियों में से लगभग एक तिहाई महज तीन राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में 1678 जजों के पद खाली है।
आंकड़ों के मुताबिक देश की जिला जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में जजों की कुल स्वीकृत क्षमता 25 हजार 771 है। इनमें से 5293 पद रिक्त हैं। आंकड़ों के अनुसार यूपी, बिहार और झारखंड में देश की जिला अदालतों में लंबित कुल मुकदमों में से एक तिहाई से भी अधिक मामले धूल फांक रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 996 जजों के पद रिक्त हैं।
राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के आंकड़ों के मुताबिक देश की जिला अदालतों में लंबित कुल 4 करोड़ 57 लाख 55 हजार मुकदमों के एक तिहाई से भी अधिक मामले इन्हीं तीन राज्यों में वर्षों से लंबित है। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड की अदालतों में 1 करोड़ 57 लाख 69 हजार 786 मामले में लंबित हैं।
खाली पद भरना राज्यों की जिम्मेदारी केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने जिला अदालतों में जजों के खाली पदों से जुड़े सवाल के जवाब में राज्यसभा को बताया था कि ‘जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में जजों के खाली पदों को भरना संबंधित उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।’ उन्होंने सवाल के लिखित जवाब में सदन को बताया कि जिला अदालतों में न्यायिक अधिकारियों (जजों), प्रशासनिक कर्मचारियों, सहायक कर्मचारियों, तकनीकी कर्मचारियों और कानूनी सहायता कर्मियों की भर्ती केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इसलिए, इससे संबंधित जानकारी केंद्र सरकार के पास नहीं होती है। उन्होंने सदन को बताया था कि संवैधानिक ढांचे के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 233 और 234 के साथ अनुच्छेद 309 के प्रावधान के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए संबंधित राज्य सरकारें उच्च न्यायालय के परामर्श से न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति और भर्ती के संबंध में नियम और विनियम बनाती हैं। इन्हीं के अनुसार रिक्त पदों पर भर्तियां की जाती हैं।
जिला अदालत में कहां कितने मामले लंबित
राज्य लंबित मामले
उत्तर प्रदेश 1,16,14,459
बिहार 36,10,441
गुजरात 15,60,337
दिल्ली 15,25,315
मध्य प्रदेश 20,32,939
महाराष्ट्र 54,84,093
झारखंड 5,44,886
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