लखनऊ, लेखपाल की ओर से किए गए सत्यापन, जिसे सभी सरकारी विभाग स्वीकार करते हैं, उसे भी निजी स्कूल मानने को तैयार नहीं हैं।
एडीएम ज्योति गौतम ने बताया कि स्कूल अपने स्तर से सत्यापन की बात कहकर, गरीबों को भी ‘पैसे वाला’ बताकर आवेदन खारिज कर रहे हैं। स्कूल अक्सर आय अधिक होने जैसे मनगढ़ंत तर्क देते हैं। बीएसए और डीआईओएस जैसे अधिकारी भी इन बच्चों का दाखिला कराने के लिए अभिभावकों की तरह सिफारिश को मजबूर हैं लेकिन स्कूल प्रबंधन अपने नियमों को कानून से ऊपर मान रहा है।
इस साल 18083 माता पिता ने अपने बच्चों के लिए आरटीई के तहत आवेदन किया था। स्कूल आनाकानी न करें, इसके लिए जिलाधिकारी विशाख जी के स्तर से लगातार निगरानी की जा रही है।
अब तक 11431 बच्चों का दाखिला कराया जा चुका है। वहीं, कुछ अभिभावकों को जो स्कूल मिला है वे वहां अपने बच्चे का दाखिला करने से इनकार कर रहे हैं। एडीएम ज्योति गौतम के अनुसार शिक्षा विभाग ऐसे अभिभावकों से बात कर उनको समझाने का प्रयास कर रहा है।
जिला प्रशासन के अनुसार एक अच्छा पहलू यह है कि चंद स्कूलों को छोड़ दें तो ज्यादातर ने गरीब बच्चों को दाखिला दिया है। अब तक 93 फीसदी बच्चों के दाखिले हो चुके हैं।
गिरीश नारायण का बेटा ऋषि अच्छे स्कूल में दाखिले का इंतजार कर रहा है लेकिन दाखिला नहीं मिल रहा।
सुखद पहलू: 93 फीसदी दाखिले हुए
877 बच्चे चिह्नित स्कूल में मिलेगा प्रवेश
लखनऊ। बाल भिक्षावृत्ति, बालश्रम और निराश्रित बच्चों की देखभाल के संबंध में शुक्रवार को बैठक हुई। कमिश्नर डॉ. रोशन जैकब की अध्यक्षता में हुई इस समीक्षा में ऐसे बच्चों को स्कूलों मे दाखिला दिलाने का निर्देश दिया गया। सात मलिन बस्तियों में 877 बच्चे चिह्नित किए गए हैं। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि भिक्षावृत्ति और स्लम बस्तियों में रहने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दाखिला दिलाया जाए। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना व बाल श्रमिक विद्या योजना से भी ऐसे बच्चों को जोड़ने के निर्देश दिए गए।
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