एनपीएस में निवेश के चार नए विकल्प मिलेंगे: निवेशकों के लिए अब उपलब्ध होंगे 14 कोष प्रबंधक, पीएफआरडीए ने दी मंजूरी

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एनपीएस में निवेश के चार नए विकल्प मिलेंगे: निवेशकों के लिए अब उपलब्ध होंगे 14 कोष प्रबंधक, पीएफआरडीए ने दी मंजूरी

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के निवेशकों के लिए जल्द निवेश के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे। पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने चार नए पेंशन फंड को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही एनपीएस के तहत पेंशन फंड की कुल संख्या बढ़कर 14 हो गई है।

पीएफआरडीए के मुताबिक, नए फंड मैनेजरों के आने से एनपीएस ग्राहकों के पास निवेश के लिए ज्यादा विकल्प होंगे और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है। इसका फायदा लंबी अवधि के निवेशकों को मिल सकता है। निवेशक के पास किसी एक फंड मैनेजर पर निर्भर रहने की मजबूरी कम होगी। वह अलग-अलग फंड मैनेजरों के प्रदर्शन, निवेश रणनीति, शुल्क और सेवा की तुलना करके फैसला कर सकता है। प्राधिकरण के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में एनपीएस की कम जोखिम वाली योजनाओं (कंजर्वेटिव स्कीम) ने औसतन 9.2 से 9.3 प्रतिशत सालाना रिटर्न दिया है।

एनपीएस में ऐसे होता निवेश : एनपीएस खाता खुलवाने के बाद सदस्य इक्विटी, सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड और अन्य निवेश विकल्पों में निवेश कर सकते हैं। इसके लिए उसे एक पेंशन फंड मैनेजर का चुनाव करना होता है। इसके बाद वह खुद अपने निवेश विकल्‍प का चयन करता है। एनपीएस सदस्य निवेश के लिए एक्टिव या ऑटो ऑप्‍शन में भी चुनाव कर सकता है। एनपीएस सदस्य को कुछ शर्तों के साथ पेंशन फंड मैनेजर को बदलने की अनुमति भी देता है।

मौजूदा समय में 10 फंड मैनेजर अलग-अलग तरह से एनपीएस का प्रबंधन कर रहे हैं। पेंशन फंड मैनेजर का काम एनपीएस में जमा सदस्य की रकम को निवेश करना होता है। वह तय नियमों के अनुसार पैसा शेयर बाजार, सरकारी बॉन्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड और अन्य निवेश साधनों में लगाता है। उसका उद्देश्य लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देना और निवेशकों की पेंशन राशि बढ़ाना होता है।

ऐसे होगी तुलना

नए टूल में एक्सआईआरआर पद्धति का इस्तेमाल किया गया है। इसमें निवेश की राशि और हर किस्त के समय को ध्यान में रखकर वार्षिक रिटर्न की गणना की जाती है। इससे निवेशकों को यह समझने में आसानी होगी कि उनके नियमित निवेश पर अलग-अलग फंड मैनेजरों का प्रदर्शन कैसा रहा है।

रिटर्न पर ऐसे असर

विशेषज्ञों के अनुसार, फंड मैनेजर बदलने से रिटर्न की गारंटी नहीं होती, क्योंकि यह बाजार की स्थिति और निवेश रणनीति पर निर्भर करता है। हालांकि, बेहतर निवेश प्रबंधन और प्रभावी पोर्टफोलियो चयन से लंबे समय में अच्छा प्रदर्शन करने की संभावना बढ़ सकती है।

सदस्यों को क्या फायदा होगा

विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक फंड मैनेजर होने से निवेशकों को बेहतर प्रदर्शन करने वाले फंड चुनने का अवसर मिलेगा। कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने से बेहतर निवेश रणनीति, बेहतर ग्राहक सेवा और तकनीकी सुविधाएं मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। यदि कोई फंड लगातार कमजोर प्रदर्शन करता है तो निवेशक दूसरे फंड मैनेजर का विकल्प चुन सकते हैं।

नए टूल से जांच सकेंगे कंपनियों का प्रदर्शन

प्राधिकरण ने प्राइड-दिशा नाम से नया टूल शुरू किया है, जिसकी मदद से

अलग-अलग पेंशन फंड के प्रदर्शन की

तुलना की जा सकती है। यह तुलना सामान्य रिटर्न के बजाय निवेशक के वास्तविक निवेश पैटर्न के आधार पर करता है। अब तक एनपीएस फंड का प्रदर्शन केवल किसी तय अवधि के रिटर्न के आधार पर दिखाया जाता था, जबकि अधिकांश निवेशक हर महीने योगदान करते हैं। ऐसे में यह तरीका उनकी वास्तविक कमाई को सही तरीके से नहीं दर्शाता था।

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