फर्जी डिग्रीधारी 62 वकीलों पर केस
● बार कौंसिल की ओर से सिविल लाइंस थाने में दी 105 के खिलाफ तहरीर
● विभिन्न विश्वविद्यालयों से कराए गए सत्यापन में डिग्री व अंकपत्र मिले गलत
प्रयागराज, फर्जी शैक्षिक दस्तावेज के सहारे अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराने के आरोप में सोमवार रात करीब आठ बजे तक 62 अधिवक्ताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने सिविल लाइंस थाने में 105 अधिवक्ताओं के खिलाफ तहरीर दी है। ऐसे में नामजद एफआईआर की संख्या में अभी और अधिक बढ़ोतरी होगी। इन अधिवक्ताओं के अभिलेखों की विभिन्न विश्वविद्यालयों से कराए गए सत्यापन में फर्जी डिग्री और अंकपत्र मिलने के आरोप हैं।
बार कौंसिल के सचिव आरके शुक्ला ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन जून को अधिवक्ताओं के अभिलेखों व डिग्रियों की जांच का आदेश दिया था। पंजीकृत अधिवक्ताओं के अभिलेखों का सत्यापन करने कर फर्जी डिग्रियों का मामला सामने आया। पुलिस ने सोमवार को दिलीप शर्मा, मनीष कुमार इंद्रमणि पांडेय, शेषनारायण, राजकुमार, त्रिभुवन पाल, अमर सिंह यादव, अजय पांडेय, सत्यव्रत, संतोष ओझा समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इसमें प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़ समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों के अधिवक्ता शामिल हैं। बार कौंसिल की ओर से सत्यापन के बाद संबंधित अधिवक्ताओं को नोटिस भी भेजा गया था लेकिन, अब तक उनकी ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। उधर, सिविल लाइंस पुलिस का कहना है कि बार कौसिंल की ओर से बड़ी संख्या में नामजद तहरीर दी गई है। तहरीरों के आधार पर एफआईआर दर्ज की जा रही है। उधर, सवाल यह भी उठने लगा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में फर्जी डिग्री और अंकपत्र कैसे और किससे हासिल किया गया था। फिलहाल पुलिस ने इन बिंदुओं पर भी पड़ताल शुरू कर दी है।
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