पहले अंतरजनपदीय स्थानांतरण, फिर शिक्षक भर्ती: सरकार के सामने रखा गया व्यावहारिक प्रस्ताव

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 पहले अंतरजनपदीय स्थानांतरण, फिर शिक्षक भर्ती: सरकार के सामने रखा गया व्यावहारिक प्रस्ताव

विधानसभा में सरकार द्वारा बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में 60,958 पद रिक्त होने की जानकारी दिए जाने के बाद अंतरजनपदीय स्थानांतरण की मांग ने फिर जोर पकड़ा है। शिक्षकों का कहना है कि यदि हजारों पद रिक्त हैं और नई भर्ती की प्रक्रिया प्रस्तावित है, तो भर्ती से पहले पात्र शिक्षकों का अंतरजनपदीय स्थानांतरण किया जाना व्यावहारिक समाधान हो सकता है।

प्रस्ताव के अनुसार, पहले पात्र शिक्षकों का अंतरजनपदीय स्थानांतरण किया जाए और इसके बाद रिक्त पदों पर नई भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। यदि जनगणना जैसी प्रशासनिक जिम्मेदारियों के कारण तत्काल रिलीविंग संभव न हो, तो शिक्षकों को जनगणना कार्य पूरा होने के बाद कार्यमुक्त किया जा सकता है। इससे विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात यानी PTR को भी संतुलित रखने में मदद मिल सकती है।

करीब 40 हजार शिक्षक परिवारों को मिलेगा लाभ

शिक्षकों का तर्क है कि अंतरजनपदीय स्थानांतरण होने से लंबे समय से अपने गृह जनपद के निकट तैनाती की प्रतीक्षा कर रहे लगभग 40 हजार शिक्षक परिवारों को राहत मिल सकती है। वहीं, स्थानांतरण के बाद उत्पन्न होने वाले रिक्त पदों को नई भर्ती के माध्यम से भरा जा सकता है।

इस तरह एक ओर वर्षों से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर लगभग 60 हजार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।

एक फैसले से दो बड़े लाभ

शिक्षकों का कहना है कि “पहले स्थानांतरण, फिर भर्ती” की नीति कर्मचारी हित और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद हो सकती है। इससे एक साथ दो वर्गों को लाभ मिलेगा—पुराने शिक्षकों को मनचाहे स्थान के करीब जाने का अवसर और नए अभ्यर्थियों को नियुक्ति का मौका।

प्रस्ताव रखने वालों के अनुसार, यदि लगभग 40 हजार शिक्षक परिवार और लगभग 60 हजार संभावित नियुक्तियां जोड़ें तो करीब एक लाख परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। इन परिवारों के माता-पिता, जीवनसाथी, बच्चों और अन्य परिजनों को जोड़ने पर इसका सामाजिक प्रभाव और व्यापक हो सकता है।

सरकार से की गई मांग

शिक्षकों की मांग है कि सरकार अंतरजनपदीय स्थानांतरण और नई शिक्षक भर्ती को एक-दूसरे के विकल्प के रूप में न देखते हुए क्रमबद्ध तरीके से लागू करे। पहले पात्र शिक्षकों का स्थानांतरण किया जाए और इसके बाद रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए।

उनका कहना है कि यह किसी एक वर्ग का अधिकार छीनने की मांग नहीं है, बल्कि स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं—दोनों के हित में संतुलित समाधान है।

“पहले अंतरजनपदीय स्थानांतरण, फिर भर्ती” की मांग अब सरकार के सामने एक ऐसे प्रस्ताव के रूप में रखी जा रही है, जिससे शिक्षक हित, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार—तीनों को एक साथ लाभ पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।

पहले अंतरजनपदीय स्थानांतरण, फिर शिक्षक भर्ती: सरकार के सामने रखा गया व्यावहारिक प्रस्ताव

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