बरेली के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत 6100 रसोइयों के लिए होली से पहले अच्छी खबर आई है। उनके खातों में जनवरी तक का मानदेय ट्रांसफर हो गया है, जिससे उन्हें 6000-6000 रुपये मिले हैं। रसोइयों ने इस पर खुशी जताई है और प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी हिंदुस्तान का आभार व्यक्त किया है।
यह कार्रवाई हिंदुस्तान में 6 मार्च को प्रकाशित एक खबर के बाद हुई है, जिसमें रसोइयों की समस्याओं को उजागर किया गया था। रसोइयों की प्रमुख समस्या कम मानदेय और समय पर भुगतान न होना है, खासकर त्योहारों के समय। उन्होंने हिंदुस्तान से होली से पहले मानदेय दिलाने की मांग की थी।
हिंदुस्तान ने उनकी मांग को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई की। 7 मार्च को ही रसोइयों के खातों में 3000-3000 रुपये भेजे गए, और बाकी 3000-3000 रुपये सोमवार को भेजे गए। मिड डे मील के जिला समन्वयक गौरव तिवारी ने बताया कि नवंबर 2024, दिसंबर 2024 और जनवरी 2025 का मानदेय रसोइयों के खातों में भेज दिया गया है, और आगे भी समय पर भुगतान का प्रयास किया जाएगा।
रसोइयों को केवल 2000 रुपये मासिक मानदेय मिलता है, जो अक्सर समय पर नहीं आता है। वे साल में 11 महीने काम करते हैं, लेकिन उन्हें केवल 10 महीने का मानदेय मिलता है। उन्होंने मानदेय बढ़ाने और स्वास्थ्य और जीवन बीमा योजना लागू करने की मांग की है।
रसोइयों के मानदेय का गणित इस प्रकार है: केंद्र सरकार ने 1000 रुपये स्वीकृत किए हैं, जिसमें 60% केंद्र और 40% राज्य सरकार देती है। राज्य सरकार ने बाद में 500-500 रुपये बढ़ाए, लेकिन बजट में देरी के कारण भुगतान में भी देरी होती है, जिससे रसोइयों को परेशानी होती है।
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