‘बिना पूर्व सूचना बिजली बिल में 10% Surcharge कैसे लगा दिया?’ ऊर्जा मंत्री ने UPPCL चेयरमैन से मांगा जवाब – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं पर लगाए गए 10 प्रतिशत Surcharge को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने UPPCL (उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड) के चेयरमैन आशीष गोयल को पत्र लिखकर कई अहम सवालों के जवाब मांगे हैं।

मंत्री ने आरोप लगाया है कि महत्वपूर्ण निर्णयों में उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया और बिना पर्याप्त जानकारी के ऐसे फैसले किए गए, जिनका सीधा असर लाखों बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ा है।

10% Surcharge लगाने पर उठाए सवाल

ऊर्जा मंत्री ने अपने पत्र में पूछा है कि बिजली बिलों में 10 प्रतिशत अधिभार (Surcharge) लगाने का निर्णय बिना व्यापक जानकारी और पूर्व सूचना के कैसे लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले की जानकारी उन्हें मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से मिली।

मंत्री ने इस विषय पर UPPCL प्रबंधन से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है और निर्णय लेने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।

मुख्यालय से बाहर रहने पर भी जताई नाराजगी

पत्र में ऊर्जा मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि मई माह में आंधी-पानी के कारण प्रदेश के कई क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई थी। उस दौरान समीक्षा बैठक के लिए UPPCL अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन उन्हें बताया गया कि चेयरमैन मुख्यालय से बाहर हैं।

मंत्री ने सवाल उठाया कि आपदा जैसी परिस्थितियों में वरिष्ठ अधिकारियों का मुख्यालय से बाहर रहना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।

कर्मचारियों की छंटनी का भी उठाया मुद्दा

ऊर्जा मंत्री ने अपने पत्र में बिजली विभाग में कर्मचारियों की छंटनी (Retrenchment) का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में विभाग में लगातार कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही है, जिससे कार्य व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

मंत्री ने आशंका जताई कि यदि अनुभवी कर्मचारियों की संख्या घटती रही तो भविष्य में बिजली आपूर्ति और उपभोक्ता सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

छह पुराने पत्रों का भी दिया हवाला

रिपोर्ट के अनुसार ऊर्जा मंत्री ने अक्टूबर से अब तक लिखे गए अपने छह पूर्व पत्रों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि विभागीय मामलों, कर्मचारियों की नियुक्तियों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े कई मुद्दों पर पहले भी सवाल उठाए गए थे, लेकिन अपेक्षित जवाब नहीं मिला।

जवाब का इंतजार

ऊर्जा मंत्री द्वारा उठाए गए सवालों के बाद अब सभी की निगाहें UPPCL प्रबंधन के जवाब पर टिकी हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में UPPCL की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बिजली उपभोक्ताओं और कर्मचारी संगठनों के बीच भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसका सीधा संबंध बिजली बिलों और विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़ा हुआ है।

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