परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद पर एकेडमिक गुणांक को समाप्त कर केवल सुपर टेट के अंकों के आधार पर चयन करने की मांग उठी है। बेसिक शिक्षा परिषद के नगर क्षेत्र के स्कूलों में सहायक अध्यापकों के 11508 पदों पर विज्ञापन जारी होने से पहले ही अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष और सचिव को इस संबंध में ज्ञापन भेजा है।
छात्रों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में शिक्षक भर्ती की अंतिम मेरिट में हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक तथा प्रशिक्षण पाठ्यक्रम (बीटीसी/डीएलएड) के एकेडमिक अंकों (गुणांक) को जोड़ा जाता है। पिछले कुछ वर्षों में सीबीएसई और सीआईएससीई जैसे बोर्डों और विश्वविद्यालयों की अंकन पद्धति में बड़े बदलाव आए हैं, जहां अब शिक्षार्थियों को अत्यधिक उच्च प्रतिशत (90 प्रतिशत से अधिक) मिलना आम बात हो गई है। इसके विपरीत पूर्व के वर्षों में (विशेषकर यूपी बोर्ड और राज्य विश्वविद्यालयों में) मूल्यांकन अत्यंत कठोर होता था। ऐसे में अलग-अलग दशकों और विभिन्न बोर्डों के अंकों की सीधी तुलना करना अनुचित है। इस विसंगति के कारण प्रतिभाशाली और योग्य अभ्यर्थी सिर्फ इसलिए चयन प्रक्रिया में पिछड़ जाते हैं क्योंकि उनका पुराना एकेडमिक रिकॉर्ड आज के मार्किंग ट्रेंड के समकक्ष नहीं ठहरता, भले ही वे सुपर टेट की परीक्षा में उत्कृष्ट अंक क्यों न प्राप्त कर लें। बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी बेसिक शिक्षक भर्ती में एकेडमिक अंकों को चयन का आधार नहीं बनाया जाता है।
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