टीईटी अनिवार्यता : समीक्षा याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
नई दिल्ली। कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य करने के फैसले के खिलाफ दायर समीक्षा याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। विशेष बात यह रही कि आमतौर पर चेंबर में होने वाली सुनवाई के विपरीत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई खुली अदालत में की।
सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता। पीठ ने शिक्षकों से यह भी कहा कि उन्हें परीक्षा पास करने के लिए पहले भी पर्याप्त अवसर दिए गए थे।
गत वर्ष सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि कक्षा 1 से 8 तक के सभी शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य है, जिनकी सेवाएं पांच वर्ष से अधिक बची हैं। ऐसे शिक्षकों को दो वर्ष का समय दिया गया था। वहीं, जिनकी नौकरी पांच साल से कम बची है, उन्हें भी पदोन्नति (प्रमोशन) के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक बताया गया था।
आजीविका का संकट
इस फैसले के खिलाफ 225 से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं। शिक्षकों का दावा है कि इस आदेश से देशभर के लाखों शिक्षकों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। सुनवाई के बाद ऑल इंडिया बीटीसी शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल यादव ने उम्मीद जताई कि न्यायालय शिक्षकों के हित में न्याय करेगा।
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