नई दिल्ली, । सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि संतान कोई संपत्ति नहीं है। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी शादी के वक्त एक लड़की के नाबालिग होने के आधार पर उसके पति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के लिए दाखिल याचिका को खारिज करते हुए की।
कोर्ट ने लड़की के माता-पिता की ओर से दाखिल अर्जी खारिज करते हुए कहा कि आपको अपने बच्चे को कैद करने का अधिकार नहीं है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना व न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा है कि तथ्यों से जाहिर है कि शादी के वक्त लड़की नाबालिग नहीं थी और व्यक्ति के खिलाफ इसलिए मुकदमा दर्ज किया गया क्योंकि उसके (लड़की के) माता-पिता को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। मुख्य न्यायाधीश ने लड़की के माता-पिता से कहा, ‘आपको कैद करने का अधिकार नहीं है…आप अपने बालिग बच्चे के रिश्ते को स्वीकार नहीं करते हैं। आप अपनी संतान को एक संपत्ति मानते हैं। आपको बता दूं कि संतान कोई संपत्ति नहीं है।’
शीर्ष कोर्ट ने लड़की के माता-पिता से कहा कि आप अपनी बेटी की शादी को स्वीकार करें। माता-पिता ने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के फैसले को चुनौती दी थी।
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