बिजनौर, शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने वाला एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। नजीबाबाद ब्लॉक के समग्र विद्यालय वंश गोपालपुर में तैनात दिवंगत शिक्षक तेजपाल सिंह का नाम समाकेतिक शिक्षा के पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि तेजपाल सिंह का निधन 11 माह पहले लंबी बीमारी के कारण हो चुका है, लेकिन विभाग के दस्तावेजों में आज भी उनका नाम सक्रिय बना हुआ है। पहले भी सूची में आता रहा है दिवंगत का नाम
खंड शिक्षा कार्यालय द्वारा जारी प्रशिक्षुओं की सूची में क्रमांक 12 पर तेजपाल सिंह का नाम दर्ज है। यह पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले भी आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में उनका नाम शामिल किया गया था। यह दर्शाता है कि विभाग की लापरवाही लगातार बनी हुई है और ऐसे मामलों की न तो समीक्षा की जाती है, न ही सुधार किया जाता है। शिक्षा विभाग में आए दिन ऐसे मामले सामने आते हैं, जो यह साबित करते हैं कि दस्तावेजों का सही से अद्यतन (अपडेट) नहीं किया जाता। इस तरह की गलतियां न केवल प्रशासनिक अनदेखी को उजागर करती हैं, बल्कि यह भी दिखाती हैं कि विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी का अभाव है।
मृतक आश्रित कोटे में नौकरी के दौरान भी हुई थी गड़बड़ी
तेजपाल सिंह के निधन के बाद उनके पुत्र सुमित ने मृतक आश्रित कोटे के तहत शिक्षक पद के लिए आवेदन किया था। हालांकि, उनकी शैक्षिक योग्यता केवल बीएड थी, जो प्राथमिक शिक्षक पद के लिए मान्य नहीं थी। इसके बावजूद, नजीबाबाद ब्लॉक के लिपिक मोहम्मद इमरान ने नियमों की अनदेखी करते हुए उनकी फाइल सत्यापित कर बीएसए कार्यालय भेज दी थी। बाद में इस गड़बड़ी के सामने आने पर लिपिक को निलंबित कर दिया गया था।
अधिकारियों ने बताया तकनीकी त्रुटि
खंड शिक्षा अधिकारी राजमोहन अग्रवाल ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि प्रशिक्षण सूची ऑनलाइन जनरेट की जाती है, इसलिए संभव है कि त्रुटिवश मृतक शिक्षक का नाम शामिल हो गया हो। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर आवश्यक संशोधन किया जाएगा।
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