लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की मांग पर 2018 में तय हुआ था कि विभागों में एजेंसी के माध्यम से रखे गए कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण आदि के लिए सेवा नियमावली तीन माह में तैयार कर जारी की जाएगी। क्योंकि ऐसे कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं मिलता व एजेंसी जब चाहती है उन्हें हटा देती है।
परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत व महामंत्री अतुल मिश्रा ने कहा कि ऐसे कर्मियों को सेवा सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, भत्ते, बोनस, बीमा, पेंशन, मृतक आश्रित नियमावली का लाभ जैसी सुविधाएं अनुमन्य की जाएं। साथ ही विभागों में उनकी वरिष्ठता सूची बनाई जाए। मिश्रा ने बताया कि परिषद के प्रयास से कार्मिक विभाग द्वारा मसौदा तैयार किया गया। इसकी एक प्रति 13
फरवरी 2019 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव कार्मिक मुकुल सिंघल द्वारा परिषद को उपलब्ध कराई गई। इस पर परिषद ने सम्यक परीक्षण के बाद 22 फरवरी 2019 को कुछ सुविधाओं को जोड़ने का प्रस्ताव दिया था।
तत्कालीन मुख्य सचिव ने तीन महीने में शासनादेश जारी करने की बात कही थी, मगर तीन साल से अधिक समय हो जाने के बाद भी अभी तक निर्णय नहीं हो पाया। इससे कर्मचारियों में आक्रोश है। यदि सरकार व शासन कर्मचारियों के हित में उनकी समस्याओं के निस्तारण को गति नहीं देता है तो निश्चित रूप से कर्मचारियों को एक बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
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