समायोजन 3.0 पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आदेश जारी कर, देखें क्या है ऑर्डर – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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समायोजन 3.0 पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आदेश जारी कर दिया है । समायोजन रद्द नहीं किया गया है । याचियो को पुनः प्रत्यावेदन देना होगा । जिला समिति निर्णय लेगी की समायोजन किया जाना चाहिए अथवा नहीं ।

बड़ी खबर …

इलाहाबाद हाई कोर्ट

समायोजन 3.0 का आदेश जारी 

👉 जस्टिस मंजू रानी चौहान ने सुनाया फैसला ✍️

👉 रूल 21 के तहत समस्त याचिका डिस्पोज़ कर दिया गया है।

मामला क्या था?

राज्य सरकार ने 14.11.2025 को एक Government Order (G.O.) जारी किया, जिसमें प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों का पुनः समायोजन (redeployment/transfer) करने का आदेश दिया गया, ताकि हर स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात (Pupil-Teacher Ratio) सही रहे।

शिक्षकों ने इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी।

🔹 शिक्षकों की मुख्य दलीलें

जुलाई 2025 में पहले ही ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, फिर नवंबर में दोबारा क्यों?

14.11.2025 वाले आदेश में स्पष्ट प्रक्रिया (procedure) नहीं बताई गई।

कई जिलों में अलग-अलग तरीके अपनाए गए — जिससे अव्यवस्था हुई।

“Last Come, First Go” जैसे सिद्धांत का गलत उपयोग हुआ।

बिना सुनवाई (hearing) के ट्रांसफर कर दिया गया।

मिड-सेशन (सत्र के बीच) में ट्रांसफर से पढ़ाई प्रभावित होगी।

अंग्रेजी माध्यम के शिक्षकों को भी हटा दिया गया।

🔹 राज्य सरकार की दलील

Right to Education Act, 2009 (RTE Act) के अनुसार हर स्कूल में न्यूनतम शिक्षक होना जरूरी है।

Article 21A के तहत बच्चों को शिक्षा देना सरकार का कर्तव्य है।

यदि किसी स्कूल में केवल 1 शिक्षक है या कोई शिक्षक नहीं है, तो वहाँ शिक्षक भेजना जरूरी है।

ट्रांसफर सेवा का सामान्य हिस्सा (incident of service) है।

ट्रांसफर एक ही जिले के अंदर हुए हैं।

कोई भी शिक्षक किसी एक स्कूल में बने रहने का “अधिकार” नहीं रखता।

🔹 कोर्ट ने क्या कहा?

1️⃣ सरकार का आदेश वैध है

कोर्ट ने कहा कि 14.11.2025 का G.O. मनमाना (arbitrary) नहीं है।

यह RTE Act, 2009 के पालन के लिए जारी किया गया है।

2️⃣ जुलाई के बाद भी ट्रांसफर हो सकता है

हालाँकि नियम में जुलाई से पहले समीक्षा की बात है, लेकिन यदि बाद में जरूरत पड़े तो सरकार कार्रवाई कर सकती है।

3️⃣ ट्रांसफर सेवा का हिस्सा है

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा:

ट्रांसफर सामान्य प्रशासनिक अधिकार है।

जब तक आदेश दुर्भावना (mala fide) या कानून के खिलाफ न हो, कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगी।

4️⃣ जिला स्तरीय समिति (District Level Committee) सही है

सरकार ने जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में समिति बनाई है।

यदि किसी शिक्षक को व्यक्तिगत शिकायत है, तो वह समिति के सामने आपत्ति दे सकता है।

5️⃣ व्यक्तिगत कठिनाई से आदेश अवैध नहीं होता

सिर्फ असुविधा या परेशानी के आधार पर ट्रांसफर रद्द नहीं किया जा सकता।

🔹 अंतिम फैसला (Result)

14.11.2025 का सरकारी आदेश वैध (valid) माना गया।

ट्रांसफर आदेश रद्द नहीं किए गए।

शिक्षकों को व्यक्तिगत शिकायत हो तो जिला समिति में आवेदन करने की छूट दी गई।

👉 पूरा आर्डर यहाँ से करें डाउनलोड 👇

https://drive.google.com/file/d/1H5oG28GotaT8I_z68SQcCMcvOSpxHoUd/view?usp=drivesdk

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