प्रयागराज। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को “निपुण” बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) और स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG) की निष्क्रियता से पूरे अभियान पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रदेश स्तर पर हुई समीक्षा में सामने आया है कि उत्तर प्रदेश के लगभग 19,508 विद्यालयों में जनवरी से अब तक सपोर्टिव सुपरविजन नहीं हुआ। ऐसे में विद्यालयों में शैक्षिक गतिविधियों की निगरानी और शिक्षकों को अकादमिक सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार कई जिलों में स्थिति बेहद चिंताजनक है। राजधानी लखनऊ में ही 755 विद्यालय बिना सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के पाए गए। वहीं आगरा में 749, मथुरा में 686, मैनपुरी में 429, पीलीभीत में 344 तथा बहराइच में 836 विद्यालयों में अब तक सुपरविजन नहीं हो सका।
प्रयागराज जिले में 197 विद्यालय ऐसे पाए गए, जहां जनवरी से एक बार भी सपोर्टिव सुपरविजन नहीं किया गया। प्रतापगढ़ में 202, वाराणसी में 31 और अलीगढ़ में 77 विद्यालयों की भी अनदेखी सामने आई है।
नगर क्षेत्र के विद्यालयों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। प्रयागराज में 51 विद्यालयों तथा शंकरगढ़ क्षेत्र में 35 विद्यालय सहयोगात्मक पर्यवेक्षण से दूर रहे।
बीएसए अनिल कुमार ने बताया कि स्कूल शिक्षा महानिदेशक द्वारा मई माह में इन विद्यालयों में प्राथमिकता के आधार पर सहयोगात्मक पर्यवेक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि शिक्षण गुणवत्ता में सुधार हो और विद्यार्थियों को निपुण लक्ष्य के अनुरूप दक्ष बनाया जा सके।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एआरपी और एसआरजी की सक्रियता बढ़ाकर विद्यालयों में नियमित शैक्षिक सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि पढ़ाई की गुणवत्ता सुधरे और बच्चों को बेहतर शिक्षण वातावरण मिल सके।
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