“आधार कार्ड जन्मतिथि का प्रमाण नहीं” : इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि आधार कार्ड जन्मतिथि का वैध प्रमाण नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि केवल आधार कार्ड के आधार पर किसी व्यक्ति की वास्तविक आयु तय नहीं की जा सकती, इसलिए आवश्यकता पड़ने पर मेडिकल जांच कराई जानी चाहिए।

मामला अपहरण के एक केस से जुड़ा है, जिसमें कौशांबी निवासी अभियुक्त की गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक को अगली सुनवाई तक बरकरार रखा गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अभियुक्त की उम्र निर्धारित करने के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश मुख्य चिकित्साधिकारी प्रयागराज को दिया।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि आधार कार्ड स्वयं व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर तैयार होता है, इसलिए इसे जन्मतिथि का अंतिम और प्रमाणिक दस्तावेज नहीं माना जा सकता।

सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि विद्यालय के प्रवेश रजिस्टर में दर्ज जन्मतिथि का आधार पूछे जाने पर प्रधानाचार्य ने केवल आधार कार्ड की फोटोकॉपी प्रस्तुत की। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 94(2) के अनुसार सबसे पहले जन्म प्रमाण पत्र, हाईस्कूल प्रमाण पत्र या बोर्ड द्वारा जारी समकक्ष प्रमाण पत्र को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि ये उपलब्ध न हों, तभी नगर निगम/पंचायत द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र या मेडिकल परीक्षण का सहारा लिया जा सकता है।

खंडपीठ ने मेडिकल बोर्ड में हड्डी रोग विशेषज्ञ और दंत चिकित्सक को शामिल करने का निर्देश दिया है, ताकि वैज्ञानिक तरीके से आयु का निर्धारण किया जा सके। मामले की अगली सुनवाई 18 मई को निर्धारित की गई है।

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