हड़कंप: इसरो छोड़ वैज्ञानिक निजी क्षेत्र में जा रहे, नियम कड़े किए गए.
अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने के बाद पिछले तीन सालों में देश में तेजी से अंतरिक्ष स्टार्टअप बढे हैं। लेकिन इससे नुकसान यह हुआ कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अनुभवी वैज्ञानिकों ने भी निजी क्षेत्र का रुख किया है। बड़े पैमाने पर वैज्ञानिकों के इसरो छोड़ने के बाद चिंतित सरकार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्त और नौकरी छोड़ने के नियमों को सख्त कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में इसरो की विभिन्न प्रयोगशालाओं से सौ से भी अधिक वैज्ञानिकों और तकनीशियनों के नौकरी छोड़ने के आवेदनों के बाद यह कदम उठाया गया है। अंतरिक्ष विभाग के संयुक्त सचिव एसआर राजशेखर द्वारा हस्ताक्षरित 14 जुलाई को जारी एक ज्ञापन में कहा गया है कि ‘हाल ही में यह देखा गया है कि इसरो के ग्रुप ‘ए’ के XXवैज्ञानिक और तकनीकी कर्मियों की ओर से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे के अनुरोधों की बाढ़ आ गई है।’ आदेश में कहा है कि समूह ए के वैज्ञानिकों के इस्तीफों को सीधे स्वीकार नहीं किया जाए बल्कि उन्हें मुख्यालय को भेजा जाए।
सूत्रों के अनुसार इस साल के शुरू में लांच व्हीकल मार्क-3 (एलवीएम-3) प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोफेफ इस्तीफा देकर निजी क्षेत्र में चले गए थे। इसी प्रकार चंद्रयान-3 से जुड़े एक वरिष्ठ वैज्ञानिक आदित्य रल्लापल्ली ने भी इसरो छोड़ा है। सूत्रों की मानें तो चंद्रयान मिशन से जुड़े इसरो के केंद्र विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) से 20 से भी अधिक वैज्ञानिक इस्तीफा दे चुके हैं।
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