विस चुनाव के बाद ही पंचायत चुनाव के आसार – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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कैबिनेट द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का निर्णय किए जाने के साथ ही पंचायत चुनाव की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। आयोग की सिफारिशें प्राप्त होने, सीटों का आरक्षण तय किए जाने और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव संपन्न कराने की प्रक्रिया में ही नौ महीने से अधिक समय लगेगा। जब तक ये प्रक्रियाएं पूरी होंगी, उस समय प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान का समय रहेगा। माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जा सकेंगे। आयोग के गठन का निर्णय लिए जाने के साथ ही सरकार अब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में आयोग के गठन को लेकर चल रही सुनवाई में अपना पक्ष रखेगी, सुनवाई की तिथि 19 मई निर्धारित है।

वर्ष 2021 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 15, 19, 26 और 29 अप्रैल को चार चरणों में कराए गए थे। दो मई को मतों की गिनती हुई थी। 26 मई को ग्राम पंचायतों की पहली बैठक हुई थी। 11 जुलाई को जिला पंचायतों और 19 जुलाई को क्षेत्र पंचायतों की पहली बैठकें हुई थीं।

● आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने से लेकर चुनाव कराने तक चाहिए नौ माह से अधिक समय
● अगले वर्ष फरवरी में जब प्रक्रियाएं पूरी होंगी, तब विधानसभा चुनाव होंगे संभावित

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक पंचायत चुनाव से पूर्व ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाना जरूरी है। लिहाजा आयोग के गठन के लिए सोमवार को कैबिनेट ने स्वीकृति दी। पिछड़े वर्ग आयोग को सरकार को संस्तुतियां करने के लिए छह माह का समय दिया गया है। आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सीटों का आरक्षण तय करने के लिए विभाग को दो महीने का समय चाहिए। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग को निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 35 से 40 दिन चाहिए। इसमें नौ माह निकल जाएगा। तब तक फरवरी 2026 आ जाएगा। फरवरी 2026 में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान की तिथियां संभावित हैं।

इस तरह मार्च तक पंचायत चुनाव होने के आसार नहीं हैं।

जनसंख्या के अनुपात में दिया जाता है आरक्षण

संविधान के अनुच्छेद 243-घ के तहत प्रदेश सरकार को पंचायतों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त है। इसी क्रम में सरकार पंचायतों के स्थानों और पदों को आरक्षित करती है। नियमों के अनुसार आरक्षित सीटों की संख्या संबंधित वर्ग की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर तय की जाती है। ‘उप्र पंचायत राज (स्थानों और पदों का आरक्षण एवं आवंटन) नियमावली, 1994’ तथा ‘उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण एवं आवंटन) नियमावली, 1994’ के प्रावधान शामिल हैं।

नई सरकार के गठन के बाद यदि तत्काल पंचायत चुनाव कराए जाएं तो चुनी गई पंचायतों की पहली बैठक कराने में मई-जून 2026 आ जाएगा। इस प्रकार पूरे एक साल विलंब से पंचायत चुनाव होंगे। तब तक पंचायतों का कामकाज प्रशासक या प्रशासक समिति के हाथ में रह सकता है।

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