उत्तर प्रदेश में बीएड के आधार पर परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में चयनित सहायक अध्यापकों के लिए अनिवार्य ब्रिज कोर्स मुकदमेबाजी में फंस गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्य छह माह के विशेष पाठ्यक्रम के लिए राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) ने 30 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन लिए थे। देशभर से 67145 शिक्षकों ने आवेदन किया है जिनमें उत्तर प्रदेश के 33992 शिक्षक शामिल हैं।
यूपी के 33577 शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए राज्य से मंजूरी भी दी जा चुकी है, लेकिन कुछ राज्यों के शिक्षकों ने ब्रिज कोर्स से छूट देने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिकाएं की हैं। यही कारण है कि आवेदन के लगभग दो माह बाद भी कोर्स शुरू नहीं हो सका है। शीर्ष अदालत ने 28 जून 2018 के बाद और 11 अगस्त 2023 से पूर्व प्राथमिक स्कूलों में नियुक्त बीएड अर्हताधारी सहायक अध्यापकों को ब्रिज कोर्स करवाने के निर्देश दिए थे। इन शिक्षकों को ब्रिज कोर्स शुरू होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर एक बार में ही कोर्स पूरा करना है। कोर्स पूरा न करने वाले शिक्षकों की नियुक्ति अमान्य हो जाएगी।
● सुप्रीम कोर्ट ने छह माह का प्रशिक्षण कराने के दिए थे आदेश
● आवेदन के दो महीने बाद भी शुरू नहीं हो सका ब्रिज कोर्स
● 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 के शिक्षकों का मामला
डीएड विशेष शिक्षा वालों के प्रशिक्षण पर निर्णय नहीं
प्रयागराज । परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में बीएड की तरह बिना ब्रिज कोर्स किए पढ़ा रहे पांच हजार शिक्षकों के प्रशिक्षण पर अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। इन शिक्षकों को एनआईओएस के ब्रिज कोर्स से बाहर रखा गया है। 68500 और 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के विज्ञापन में बीएड और डीएड (विशेष शिक्षा) धारकों को नियुक्ति के बाद प्रारंभिक शिक्षा में छह माह के विशेष प्रशिक्षण (ब्रिज कोर्स) को अनिवार्य किया गया था। लेकिन नियुक्ति के तकरीबन छह साल बाद भी इनके प्रशिक्षण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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