सख्ती के बाद भी कुछ परिषदीय स्कूलों में देर से आने और जल्दी जाने की परंपरा खत्म नहीं हो पा रही

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 ज्ञानपुर। शासन और प्रशासन की सख्ती के बाद भी कुछ परिषदीय स्कूलों में देर से आने और जल्दी जाने की परंपरा खत्म नहीं हो पा रही है। मंगलवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह के निर्देश पर कराए गए निरीक्षण में प्राथमिक विद्यालय ज्ञानपुर द्वितीय तीन बजे बंद मिला। उसके मुख्य गेट पर ताला लटका मिला।

इसको लेकर हेडमास्टर समेत सभी छह शिक्षकों का वेतन रोकते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया। दो अन्य स्कूलों में बिना सूचना के अनुपस्थित रहने वाले अनुदेशक और शिक्षा मित्र का मानदेय रोका गया। परिषदीय विद्यालयों को सुबह साढ़े आठ से दोपहर तीन बजकर 30 मिनट तक संचालित करने का समय है जबकि पठन-पाठन सुबह नौ बजे तक शुरू होता है।

शासन स्तर से प्रतिदिन पोर्टल के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति की माॅनिटरिंग की जा रही है। अधिकतर स्कूलों में सुधार हो गया है, लेकिन अब भी कई विद्यालय ऐसे हैं जहां के शिक्षक, सहायक अध्यापक विलंब से स्कूल आते हैं और समय से पहले ही चले जाते हैं। प्राथमिक विद्यालय ज्ञानपुर द्वितीय को लेकर कई दिनों से लोग शिकायत कर रहे थे।

मंगलवार को बीएसए के निर्देश पर डीसी प्रशिक्षण दोपहर तीन बजकर दो मिनट पर निरीक्षण किया। उस दौरान विद्यालय पर ताला बंद मिला। इसको लेकर बीएसए ने हेडमास्टर शालिनी गुप्ता, सहायक अध्यापक प्रबल श्रीवास्तव, सविता सिंह, नीलम रानी गुप्ता, चंद्रकला पटेल, अरविंद कुमार विश्वकर्मा का वेतन रोककर स्पष्टीकरण मांगा।

इसी तरह बिना सूचना के अनुपस्थित रहने पर अभोली के प्राथमिक विद्यालय फत्तूपुर में शिक्षा मित्र ऊषा सिंह और ख्यौंखर में अनुदेशक रामजीत यादव का एक-एक दिन का मानदेय रोका गया।

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