परिषदीय स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को ऑडियो-वीडियो के माध्यम से रोचक ढंग से पढ़ाई कराने में गुरुजी रुचि नहीं ले रहे हैं। वह किताब से ही उन्हें रट्टा लगवा रहे हैं। विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, इनफॉर्मेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (लैब) व डिजिटल लाइब्रेरी शोपीस बनकर रह गए है। स्कूली शिक्षा महानिदेशालय ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिले में डिजिटल संसाधनों का न्यूनतम प्रयोग करने वाले 10-10 विद्यालय चिह्नित किए जाएंगे। डिजिटल संसाधनों का प्रयोग न करने पर प्रधानाध्यापकों से जवाब-तलब होगा।
पिछले दो वर्षों में ही 7409 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लास तैयार की गई है। वहीं 4686 आईसीटी लैब और 570 डिजिटल लाइब्रेरी बनाई गई है। फिर भी शिक्षक इसका प्रयोग नहीं कर रहे और यह डिजिटल संसाधन धूल खा रहे हैं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी की ओर से सभी मंडलों के सहायक शिक्षा निदेशकों व बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह इसकी नियमित समीक्षा करें और फिर इसका प्रयोग सुनिश्चित कराएं। विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, ताकि विद्यार्थी आसानी से पढ़ाई कर सकें।
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