#एमपी_सरकार के द्वारा Supreme court में शानदार पक्ष गया⸻
🔴 1. यह केस है क्या?
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 01.09.2025 के फैसले के खिलाफ है, जो सिविल अपील नं. 1385/2025 में दिया गया था।
उस फैसले में कोर्ट ने कहा:
👉 TET (Teacher Eligibility Test) अब सेवा में कार्यरत शिक्षकों (in-service teachers) के लिए भी अनिवार्य होगा
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🔴 2. सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या आदेश दिया था?
कोर्ट ने शिक्षकों को 3 कैटेगरी में बाँटा:
✅ (A) जिनकी सेवा में 5 साल से कम समय बचा है
* वे बिना TET के नौकरी जारी रख सकते हैं
* लेकिन प्रमोशन नहीं मिलेगा बिना TET
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⚠️ (B) जिनकी सेवा में 5 साल से ज्यादा समय बचा है
* उन्हें 2 साल के अंदर TET पास करना होगा
* अगर पास नहीं किया:
👉 नौकरी से हटाया जा सकता है (compulsory retirement)
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⚠️ (C) नए भर्ती और प्रमोशन चाहने वाले
* उनके लिए TET पूरी तरह अनिवार्य
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🔴 3. अब मध्य प्रदेश सरकार क्या कह रही है?
MP सरकार ने इस फैसले के खिलाफ Review Petition डाली है और कहा है कि:
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🔵 4. सबसे बड़ा मुद्दा – “हमें सुना ही नहीं गया”
👉 MP सरकार इस केस में पार्टी ही नहीं थी
👉 इसलिए:
* कोर्ट के सामने MP के नियम, कानून और तथ्य रखे ही नहीं गए
* यह Natural Justice का उल्लंघन है
📌 यह बहुत मजबूत ग्राउंड होता है कोर्ट में
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🔵 5. NCTE Notification (23.08.2010) का बड़ा पॉइंट
सरकार का सबसे ताकतवर तर्क यही है 👇
👉 NCTE (National Council for Teacher Education) ने खुद कहा था:
✔️ पहले से नियुक्त शिक्षकों को TET की जरूरत नहीं
Para 4 (सबसे महत्वपूर्ण):
* जो शिक्षक पहले से नौकरी में हैं
👉 उन्हें TET पास करने की आवश्यकता नहीं
📌 मतलब:
➡️ TET सिर्फ नई भर्ती के लिए था
➡️ पुराने शिक्षकों के लिए नहीं
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🔵 6. कोर्ट ने क्या गलती की (सरकार के अनुसार)?
सरकार का कहना है:
❌ कोर्ट ने यह नहीं देखा:
* Para 4 of NCTE Notification
* राज्य के नियम
* 2017 का संशोधन
👉 इसलिए फैसला “Incomplete Information” पर आधारित है
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🔵 7. RTE Act की गलत व्याख्या
कोर्ट ने RTE Act 2009 के आधार पर फैसला दिया
लेकिन सरकार कहती है:
👉 RTE Act में कहीं नहीं लिखा कि:
* सेवारत शिक्षक को TET करना ही पड़ेगा
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🔵 8. 2017 Amendment का असली उद्देश्य
सरकार ने बहुत महत्वपूर्ण बात उठाई:
👉 2017 संशोधन का उद्देश्य था:
* Untrained teachers को training देना
👉 NOT:
* नई qualification (TET) लागू करना
📌 मतलब:
➡️ Training ≠ TET
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🔵 9. राज्य बनाम केंद्र (Federal Structure)
👉 शिक्षा “Concurrent List” में आती है
मतलब:
* केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं
सरकार का तर्क:
👉 राज्य के कानून पहले से लागू थे
👉 केंद्र का कानून automatically override नहीं कर सकता
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🔵 10. 70,000 शिक्षकों पर असर
👉 इस फैसले से:
* लगभग 70,000 शिक्षक प्रभावित
📌 प्रभाव:
* नौकरी जाने का खतरा
* प्रमोशन रुक जाएगा
* मानसिक/सामाजिक असर
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🔵 11. “Error apparent on record” (कानूनी भाषा)
सरकार कहती है:
👉 फैसले में स्पष्ट गलती है क्योंकि:
* महत्वपूर्ण तथ्य कोर्ट के सामने नहीं थे
* गलत interpretation हुआ
📌 यही Review का सबसे बड़ा आधार होता है
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🔵 12. कोर्ट से क्या मांग की गई है?
✅ मुख्य मांग:
1. 01.09.2025 का फैसला रिव्यू किया जाए
2. 👉 TET को सेवारत शिक्षकों पर लागू करने वाला हिस्सा हटाया जाए
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✅ साथ में ये आवेदन भी:
* Review फाइल करने की अनुमति
* Certified copy से छूट
* Open court hearing
* MP को पार्टी बनाने की मांग
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🔴 13.सबसे मजबूत पॉइंट्स 👇
👉 1. NCTE ने खुद छूट दी है (Para 4)
👉 2. RTE Act में कहीं भी in-service TET अनिवार्य नहीं
👉 3. MP सरकार को सुना ही नहीं गया
👉 4. 70,000 शिक्षक प्रभावित हैं
👉 5. यह निर्णय अधूरा और त्रुटिपूर्ण है
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🔴 14. निष्कर्ष (सीधी भाषा में)
👉 यह रिव्यू पिटिशन कहती है:
* TET = नई भर्ती के लिए
* NOT = पुराने शिक्षकों के लिए
👉 सुप्रीम कोर्ट का फैसला:
* अधूरी जानकारी पर आधारित है
* इसलिए इसे बदलना जरूरी है।
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