नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि शिक्षकों को सम्मानजनक पारिश्रमिक न देना देश में ज्ञान के महत्व को कम करता है। अदालत ने कहा कि संविदा वाले सहायक प्रोफेसर भी अन्य सहायक प्रोफेसरों के समान वेतन के हकदार हैं।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने शिक्षाविदों और प्रोफेसरों को किसी भी राष्ट्र की ‘बौद्धिक रीढ़’ कहा, जो भविष्य की पीढ़ियों के मन और चरित्र को आकार देने में अपना जीवन समर्पित करते हैं। समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांतों को लागू करते हुए, पीठ ने निर्देश दिया कि गुजरात में संविदा पर नियुक्त कुछ सहायक प्रोफेसर अन्य सहायक प्रोफेसरों के स्वीकार्य न्यूनतम वेतनमान के हकदार होंगे।
पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के दो फैसलों के खिलाफ दायर अपीलों पर अपना फैसला सुनाया।
शीर्ष कोर्ट ने कहा कि कई संदर्भों में, शिक्षकों को दिया जाने वाला वेतन और मान्यता उनके योगदान के महत्व को सही मायने में नहीं दर्शाती है।
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