यूपी की वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी की पुष्टि, चुनाव आयोग का कर्मचारियों को हटाने, केस का निर्देश
यूपी की वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी की पुष्टि हो गई है। चुनाव आयोग ने तत्काल मामले की जांच करते हुए दो कर्मचारियों को हटाने और उनके खिलाफ केस दर्ज कराने का निर्देश दिया है। कांग्रेस ने बुधवार को लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस करके पीलीभीत की एक विधानसभा सीट की गड़बड़ियों का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख दिया। आयोग ने पीलीभीत के निर्वाचन अधिकारी से जांच कराई तो कांग्रेस की शिकायतें सही मिली। माना जा रहा है कि अभी कुछ और अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है। आयोग ने इसके साथ ही पीलीभीत के अन्य विधानसभा क्षेत्रों ही नहीं पूरे यूपी में सभी सीटों पर इस तरह की गड़बड़ियों की गहनता से जांच का निर्देश दिया है।
कांग्रेस ने बुधवार को लखनऊ में केंद्रीय चुनाव आयोग पर कई गंभीर आरोप लगाए। पार्टी के राज्य मुख्यालय में मीडिया से बात करते हुए यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने खुलासा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जारी की गई अंतिम मतदाता सूची में चुपके से वोटरों के नाम बदल दिए गए। पीलीभीत सदर विधानसभा सीट पर जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 मतदाताओं के नाम जोड़े गए।
कांग्रेस की क्या थी शिकायत
कहा कि एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम देखकर व्यक्ति संतुष्ट है। उसे तो यह इत्मिनान है कि उसका नाम मतदाता सूची में है। हालांकि, बाद में चुनाव आयोग ने मतदाता कार्ड संख्या तो वही रहने दी, लेकिन व्यक्ति का नाम बदल दिया। अब वह व्यक्ति जब मतदान करने के लिए पोलिंग बूथ पर पहुंचेगा तो वहां उसका नाम ही नहीं होगा क्योंकि उसका नाम तो बदला जा चुका है। इस तरह से आयोग पात्र मतदाताओं को वोट के अधिकार से वंचित कर देगा। इससे एक पार्टी विशेष को लाभ पहुंचाया जाएगा।
सीईओ ने पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी से मांगा जवाब
कांग्रेस के आरोपों पर तत्काल निर्वाचन आयोग एक्टिव हो गया। सीईओ नवदीप रिणवा ने पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी से मामले में रिपोर्ट तलब कर ली। कुछ घंटे में ही वहां से रिपोर्ट भी लखनऊ पहुंच गई। जिला निर्वाचन अधिकारी ने पाया कि मतदाताओं के इपिक नम्बर को ऑनलाइन सर्च करने पर किसी अन्य मतदाता का विवरण सामने आ रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा इस प्रकार की त्रुटियों को तत्काल ठीक करने और विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र 127-पीलीभीत के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और वीआरसी ऑपरेटर को मतदाता सूची के कार्य से तत्काल हटाने और उनके खिलाफ एफआईआर कराने का निर्देश दिया। इसके साथ ही सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के उत्तरदायित्व के संबंध में स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं।
आयोग ने पीलीभीत की सभी विधान सभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की इस बिन्दु पर गहनता से जांच कर विस्तृत आख्या दो दिन में मांगी है। यूपी के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी इस मामले का संज्ञान लेते हुए अपने जिले की सभी विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की गहनता से जांच करके दो दिनों में रिपोर्ट मांगी है।
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