डिजिटल कंटेंट को बच्चों का अभिभावक न बनने दें

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  गोवा। मां बच्चे को खाना चखकर देती है, लेकिन मोबाइल बिना संकोच दे दिया जाता है। डिजिटल सामग्री (कंटेट) को बिना देखे अभिभावक बच्चों के हाथ में मोबाइल पकड़ा देते हैं। इस कंटेट को बच्चों का माता पिता न बनने दें। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष और गीतकार प्रसून जोशी ने इंडिया इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (इफ्फी) में एक बातचीत के दौरान ये बातें कही।

उन्होंने कहा कि इसके के लिए लोगों को जागरूक करना जरूरी है। यदि अभिभावक अपनी जिम्मेदारी कंटेट के ऊपर डाल देंगे तो दिक्कत होगी। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए विशेष रूप से काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि अगले वर्ष इंडिया इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (इफ्फी) गोवा में बच्चों के लिए सामग्री बढ़ेगी।

फिल्म प्रतिभा से बनती है

प्रसून जोशी ने फिल्म निर्माण की चुनौतियों से जुड़े सवाल के जवाब में कहा कि फिल्म एक जादू हो सकती है, लेकिन इसे बनाना एक प्रक्रिया है। फिल्म किस्मत से नहीं, प्रतिभा से बनती है। जो इस प्रक्रिया को समझेगा वह बनाएगा। उन्होंने बताया कि इस पूरे फिल्म महोत्सव का फोकस युवा प्रतिभाओं पर है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में प्रतिभा और कहानियों की कमी नहीं है, लेकिन इनकी आवाज को मंच देने की जरूरत है।

फिल्म निर्माता इम्तियाज अली ने सेट पर महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्य संस्कृति बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, फिल्म निर्माताओं को सेट पर लैंगिक अन्याय को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। सुहासिनी मणिरत्नम ने बताया कि अक्सर पुरुष अभिनेता सेट पर आकर दृश्यों में बदलाव का सुझाव देते हैं।

सलाह: डिजिटल कंटेंट को बच्चों का अभिभावक न बनने दें

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