लखनऊ। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत दूसरे चरण की प्रक्रिया चल रही है। पहले चरण की अपेक्षा दूसरे चरण में आए कम आवेदन को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। ऐसे में प्रत्येक जिले में हर निजी विद्यालय के लिए कम से कम दस आवेदन अनिवार्य किए गए हैं।
चार चरणों में चल रही प्रवेश प्रक्रिया के तहत पहले चरण में 1.32 लाख आवेदनों में से 71381 बच्चों को सीट अलॉट हुई हैं, जबकि दूसरे चरण में 95591 ही आवेदन आए हैं। यह पहले चरण की अपेक्षा 37 हजार कम हैं।
करीब दर्जनभर जिलों में आवेदन की संख्या 500 भी नहीं पहुंची है। ऐसे में विभाग ने आगे के दो चरणों को ध्यान में रखकर निजी विद्यालय के सापेक्ष कम से कम दस आवेदन अनिवार्य किए हैं। क्योंकि अगर विद्यालय में 40 छात्रों का भी बैच है तो उसमें 20 फीसदी सीट आरटीई की हैं। ऐसे में 10 आवेदन हों तो बेहतर होगा।
समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश सिंह ने बताया कि हर जिले से कम से डेढ़ से दो हजार आवेदन जरूर हों। वहीं बड़े जिलो में यह संख्या 3000 होगी। इसके लिए संबंधित जिलों में मैप स्कूल व निर्धारित सीटों की जानकारी भी भेजी गई है। जिला, ब्लॉक, स्कूल स्तर पर बनाई गई हेल्प डेस्क पर लोगों को लाएं और आवेदन कराएं।
सभी हेल्प डेस्क संचालकों को आवेदन का लक्ष्य दिया जाए। ताकि हम इस बार तीन से चार लाख बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित किया जा सकें। बता दें कि दूसरे चरण के आवेदनों की लॉटरी 24 जनवरी और स्कूल आवंटन 27 जनवरी को होगा। तीसरे चरण के आवेदन एक फरवरी से ऑनलाइन शुरू होंगे।
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