नई दिल्ली, । भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में सालाना वृद्धि पर नियंत्रण लगाने की तैयारी में है। प्राधिकरण ऐसे प्रस्ताव का मसौदा तैयार कर रहा है, जिसमें महंगाई के मुताबिक ही प्रीमियम में सीमित बढ़ोतरी की अनुमति होगी।
प्रस्तावित मसौदे पर बीमा कंपनियों, पॉलिसीधारकों और अन्य हितधारकों से जल्द सुझाव मांगे जा सकते हैं। अब तक देखा गया है कि बीमा कंपनियां हर वर्ष 10 फीसदी की दर से प्रीमियम बढ़ा रही हैं। कई कंपनियों ने बीते वर्षों के दौरान 30-35 फीसदी से अधिक प्रीमियम बढ़ाया है।
नहीं मिल पाती राहत: अधिकांश कंपनियां बीमा पॉलिसी जारी होने के दो वर्ष के बाद सभी बीमारियों का कवरेज प्रदान करती हैं, इसलिए ग्राहक प्रीमियम बढ़ने की स्थिति में भी पॉलिसी बंद नहीं करते। वहीं कंपनियां लगातार प्रीमियम बढ़ाती चली जाती हैं। यहां तक कि प्रीमियम में छूट का लाभ उन ग्राहकों को भी नहीं दिया जाता है, जिन्होंने पॉलिसी लेने के बाद से कोई दावा नहीं किया हो।
मनमाने तरीके से प्रीमियम बढ़ाने की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। ग्राहकों से पूरा प्रीमियम लेने के बाद भी कंपनियां समय पर दावा निपटान नहीं कर रही हैं। पॉलिसी बेचने वाली कंपनियों द्वारा मरीज के इलाज के वक्त भुगतान नहीं किया जा रहा है। मनमाने तरीके से दावे की रकम कम कर दी जाती है और मरीजों को चक्कर कटाए जाते हैं।
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