यूपी बोर्ड : 3 माह पहले परीक्षा केंद्र बनाने का नियम, नीति तय नहीं – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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 यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 की तैयारियां सुस्त चल रही है। हाईकोर्ट ने 2016 में दायर एक जनहित याचिका में बोर्ड को परीक्षा से तीन महीने पहले केंद्र निर्धारित करने के आदेश दिए थे लेकिन अब तक केंद्र निर्धारण नीति ही जारी नहीं हो सकी है। नीति जारी होने के बाद केंद्र निर्धारण में दो से तीन महीने का समय लगता है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक महेन्द्र देव की ओर से एक अप्रैल को जारी शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार फरवरी 2026 से 10वीं-12वीं की परीक्षाएं शुरू होनी है।

उस हिसाब से नवंबर अंत तक हर हाल में केंद्र तय हो जाने चाहिए लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा होता संभव नहीं दिख रहा। 2025 की बोर्ड परीक्षा के लिए 17 सितंबर 2024 को ही केंद्र निर्धारण नीति जारी हुई थी और आठ दिसंबर को केंद्रों की सूची तैयार हो सकी थी। उससे पहले 2024 की बोर्ड परीक्षा के लिए नीति छह सितंबर 2023 को जारी हुई थी और दिसंबर के पहले सप्ताह में केंद्र तय हो सके थे। हालांकि इस साल अब तक केंद्र निर्धारण नीति को ही मंजूरी नहीं मिल सकी है।

ऐसे में नवंबर अंत तक केंद्रों का निर्धारण मुश्किल लग रहा है। इसे लेकर यूपी बोर्ड के अफसर भी परेशान हैं क्योंकि केंद्र निर्धारण नीति का प्रस्ताव तो दो महीने पहले ही शासन को भेजा जा चुका है और अब एक-एक दिन की देरी भारी पड़ रही है।

नीति से पहले जारी हो सकता है टाइम टेबल

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के लिए केंद्र निर्धारण नीति से पहले परीक्षा कार्यक्रम जारी हो सकता है। सूत्रों के अनुसार समय सारिणी का प्रस्ताव शासन में विचाराधीन है और एक-दो दिन में इसे सार्वजनिक किया जा सकता है। बोर्ड ने पहले ही टाइम टेबल घोषित करने की तैयारी की है ताकि बोर्ड परीक्षार्थी अपने को उसी के अनुसार तैयार कर सकें।

प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के प्रश्नपत्रों की निगरानी एआई से करने के लिए विशेषज्ञ एजेंसी नहीं मिल रही हैं।

यूपी बोर्ड ने जेम पोर्टल के माध्यम से पहले 16 अक्तूबर तक इच्छुक एजेंसियों से आवेदन मांगे, लेकिन तीन से कम आवेदक होने के कारण अंतिम तिथि 23 अक्तूबर तक बढ़ा दी गई थी। विस्तारित तिथि तक भी केवल दो एजेंसियों ने ही रुचि दिखाई है। नियमानुसार तीन से कम आवेदक होने के कारण अब बोर्ड के अधिकारियों ने शासन से अनुमति लेने का निर्णय लिया है। शासन की अनुमति मिलने के बाद ही दो में से किसी एक फर्म को प्रश्नपत्रों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। पिछले साल भी तीन फर्मों के टेंडर में आवेदन नहीं करने के कारण ही परीक्षा केंद्रों पर बने स्ट्रांग रूम की एआई से निगरानी की कवायद अधूरी रह गई थी। बोर्ड परीक्षा के लिए तकरीबन आठ हजार केंद्र बनाए जाते हैं जहां एआई से निगरानी की पूरी व्यवस्था एजेंसी को करनी है।

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