नई दिल्ली। छतों की खराब बनावट (डिजाइन) के चलते लोगों को ज्यादा गर्मी का सामना करना पड़ता है। इस कारण कमरों के अंदर वातानुकूलन का खर्च भी बढ़ जाता है। विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) की रिपोर्ट के अनुसार, अगर छतों की बनावट में कुछ बदलाव किए जाएं तो कमरे के तापमान में चार से पांच डिग्री तक की कमी लाई जा सकती है।
इन बदलावों में सूरज की रोशनी को परावर्तित करने वाले सफेद रिफ्लेक्टिव पेंट और छत पर तैयार की जाने वाली हरित पट्टी शामिल है। घर की छत पर सूरज की किरणें सबसे ज्यादा सीधी पड़ती हैं। कमरे के अंदर पहुंचने वाली गर्मी में छतों का सबसे बड़ा योगदान रहता है। आमतौर पर छत कंक्रीट की बनी होती है, जिसमें सीमेंट, सरिया, कंक्रीट और बालू आदि का इस्तेमाल होता है। यह सभी सामग्री सूरज की गर्मी अवशोषित कर धीरे-धीरे कमरे के अंदर पहुंचा देती हैं। सीएसई ने छतों की बनावट में सुधार और उसे तापमान के अनुसार ज्यादा मुफीद बनाने को लेकर थर्मली एफीशियेंट रूफ नाम से रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर घर की छतों की बनावट में तीन तरीके से सुधार किए जाएं तो कमरे के अंदर के तापमान में कमी लाई जा सकती है।
किरणों का परावर्तन
छतों की बनावट में बदलाव करके तापमान में कमी लाने के प्रयोग देश में कई स्थानों पर हो रहे हैं। अहमदाबाद, भोपाल, जोधपुर, चेन्नई जैसे कई शहरों में सफल प्रयोग किए गए हैं। अहमदाबाद में करीब तीन हजार घरों की छत पर रिफ्लेक्टिव पेंट किए गए। सूरज की किरणें परावर्तित होने के चलते कमरे के अंदर का तापमान यहां कम पाया गया।
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