प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश में दो साल का अंतराल न होने के कारण अर्ज़ी निरस्त करने को दुर्भाग्यपूर्ण ठहराया है। कोर्ट ने कहा, यह मातृत्व कानून की एक स्पष्ट शर्त नहीं है। कोर्ट ने याची शिक्षिका की अर्ज़ी निरस्त करने के निर्णय पर असहमति जताई। यह मामला मिर्जापुर के प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षिका सुमनलता का है, जो दो साल का अंतराल न होने के आधार पर मातृत्व अवकाश अर्ज़ी निरस्त कर रहे थे। न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की कोर्ट ने बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा खंड शिक्षा अधिकारी को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याची की याचिका पर सिंगल जज की बेंच ने आदेश पारित किया।
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