बड़ों की परीक्षा करवाने में छोटों की पढ़ाई का नुकसान

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 लखनऊ। प्रदेश में यूपी बोर्ड की परीक्षा शुरू हो गई है। इसमें कक्ष निरीक्षक समेत कई कामों के लिए परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को भी तैनात किया गया है। देवरिया, कौशांबी, बांदा, अमेठी, हरदोई समेत कई जिलों में स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक शिक्षक ही बचे हैं। इसकी वजह से परिषदीय स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

प्रदेश में यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 24 फरवरी से 12 मार्च तक चलेंगी। परीक्षा में माध्यमिक के राजकीय व एडेड विद्यालयों के शिक्षकों की बतौर कक्ष निरीक्षक ड्यूटी लगी है। वहीं परिषदीय विद्यालयों के भी कई शिक्षकों को कक्ष निरीक्षक बनाया गया है। परीक्षा शुरू होने से पहले से इनका प्रशिक्षण चल रह है।

अब परीक्षाएं भी शुरू हो गई हैं। इसकी वजह से बड़ों (माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों) की परीक्षा में छोटों (परिषदीय विद्यालयों के बच्चों) की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जबकि मार्च के दूसरे-तीसरे सप्ताह

बोर्ड परीक्षा का असर परिषदीय विद्यालयों की पढ़ाई पर पड़ रहा है

में ही परिषदीय विद्यालयों की भी सालाना परीक्षा प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार बोर्ड परीक्षा में माध्यमिक के वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों की तो ड्यूटी लगाई जाती है, किंतु उसमें से काफी शिक्षक आते नहीं हैं। इसकी वजह से भी बेसिक के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है।

उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ से के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि बेसिक के लगभग 80 फीसदी शिक्षकों की ड्यूटी लगाने से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।

कई जगह सिर्फ एक ही शिक्षक के भरोसे पूरा विद्यालय चल रहा है। वहीं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के निर्भय सिंह ने कहा कि बोर्ड परीक्षा ड्यूटी की वजह से बेसिक के शिक्षकों की ईएल और सीसीएल पर भी रोक लगा दी गई है। इससे काफी दिक्कत हो रही है

बड़ों की परीक्षा करवाने में छोटों की पढ़ाई का नुकसान

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