स्कूलों के बच्चे करेंगे गोशालाओं का भ्रमण, गायों की सेवा और संरक्षण का मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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प्रतापगढ़। संवाददाता। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को अब शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, पशु संरक्षण और गोसेवा के संस्कारों से भी जोड़ने की पहल शुरू की गई है। इसके तहत जिले के सरकारी स्कूलों के बच्चों को चरणबद्ध तरीके से गो संरक्षण केंद्र (गोशालाओं) का भ्रमण कराया जाएगा। भ्रमण के दौरान बच्चे न केवल गायों की देखभाल की व्यवस्था को समझेंगे, बल्कि उन्हें गायों को गुड़ और रोटी खिलाने, उनकी उपयोगिता जानने तथा पशु संरक्षण के महत्व की जानकारी भी दी जाएगी।

यह निर्णय गो संरक्षण केंद्रों की समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी (डीएम) अभिषेक पांडेय की अध्यक्षता में लिया गया। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि विद्यालयों के बच्चों के भ्रमण के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार कर जल्द क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

भ्रमण के लिए बनेगा रोस्टर

डीएम ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (CVO) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को निर्देश दिए हैं कि स्कूलवार भ्रमण का रोस्टर तैयार किया जाए। गो संरक्षण केंद्रों को पहले से सूचना देकर बच्चों के स्वागत, सुरक्षा और भ्रमण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक अनुभव मिल सके।

विशेषज्ञ देंगे गो संरक्षण की जानकारी

भ्रमण के दौरान गो संरक्षण केंद्रों पर मौजूद पशु चिकित्सक एवं विशेषज्ञ विद्यार्थियों को गायों की देखभाल, चारा प्रबंधन, स्वास्थ्य संरक्षण तथा भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गोवंश के महत्व के बारे में जानकारी देंगे। बच्चों को यह भी बताया जाएगा कि गाय और गोवंश पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती तथा दुग्ध उत्पादन के माध्यम से समाज के लिए कितने उपयोगी हैं।

77 गो संरक्षण केंद्रों में लागू होगी पहल

जिले में वर्तमान में 77 गो संरक्षण केंद्र संचालित हैं, जहां संरक्षित गोवंश की देखभाल विभिन्न विभागों की देखरेख में की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य इन केंद्रों को केवल संरक्षण स्थल तक सीमित न रखकर उन्हें शैक्षिक एवं जागरूकता केंद्र के रूप में भी विकसित करना है।

बच्चों में विकसित होंगे सेवा और संवेदनशीलता के संस्कार

प्रशासन का मानना है कि इस पहल से बच्चों में पशु संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति सकारात्मक सोच विकसित होगी। साथ ही विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और गोसेवा से जुड़े मूल्यों को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिलेगा।

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