राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी

primarymaster.in


राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी

। जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को नियमित रूप से सभी विषयों की शिक्षा नहीं मिल पा रही है। जिले के 42 राजकीय विद्यालयों में लगभग 300 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। इसके अलावा 11 विद्यालयों में प्रधानाचार्य नहीं हैं, जबकि प्रवक्ताओं के 113 पद खाली चल रहे हैं।

शिक्षकों की कमी के कारण विद्यालयों में पठन-पाठन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कई विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।

11 राजकीय विद्यालयों में प्रधानाचार्यों की तैनाती नहीं

जिले के 10 जीआईसी और 9 जीजीआईसी में शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ प्रधानाचार्यों की भी कमी है। कुल 11 राजकीय विद्यालय ऐसे हैं, जहां नियमित प्रधानाचार्य तैनात नहीं हैं।

जिले में कुल 43 राजकीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 10 राजकीय इंटर कॉलेज और 9 राजकीय बालिका इंटर कॉलेज शामिल हैं। शेष राजकीय हाईस्कूल हैं।

राजकीय विद्यालयों की इस समस्या पर अब तक किसी जनप्रतिनिधि ने विशेष ध्यान नहीं दिया है। प्रधानाचार्यों के पद खाली होने से विद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था और शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।

राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की कमी

जिले में राजकीय इंटर कॉलेज के अतिरिक्त राजकीय हाईस्कूल भी संचालित हैं। इंटर तक के राजकीय विद्यालयों में पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी कई वर्षों से बनी हुई है। सभी 19 राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की कमी बताई गई है।

अध्यापकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। विद्यालयों में नामांकन और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने की चुनौती के बीच शिक्षकों के रिक्त पद भरना भी आवश्यक हो गया है।

प्रवक्ताओं के 113 पद खाली, सहायक अध्यापकों की भी कमी

राजकीय विद्यालयों में प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों के बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं।

रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार:

प्रधानाचार्य: 17 पद स्वीकृत, केवल 6 पर तैनाती, 11 पद रिक्त।

प्रवक्ता: 179 स्वीकृत पदों में से 63 पर नियमित तैनाती, जबकि 116 पद खाली बताए गए हैं।

सहायक अध्यापक: 343 स्वीकृत पदों में से 156 पर तैनाती, 187 पद रिक्त।

इस प्रकार प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापकों के कुल 303 पद खाली हैं। हालांकि समाचार की मुख्य हेडलाइन में प्रवक्ताओं के 113 पद रिक्त बताए गए हैं, जबकि विस्तृत विवरण में यह संख्या 116 दी गई है।

डीआईओएस ओमप्रकाश राणा ने बताया कि राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के संबंध में शासन को अवगत कराया गया है।

शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित

राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेजों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से पठन-पाठन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण विषयवार शिक्षण कार्य में परेशानी आ रही है। शिक्षकों की संख्या कम होने का असर विद्यार्थियों की शैक्षणिक तैयारी पर भी पड़ रहा है।

विशेषज्ञों और शिक्षकों का मानना है कि यदि विद्यालयों में समय से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के नामांकन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

शिक्षकों की कमी पर क्या बोले शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग?

अंजू मिश्रा ने कहा कि राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर की जानी चाहिए। इसका बच्चों की शिक्षा पर असर पड़ रहा है। सरकार को इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।

आशुतोष सिंह ने कहा कि राजकीय विद्यालयों में प्रवक्ताओं के साथ सहायक अध्यापकों के पद भी रिक्त चल रहे हैं। यह कमी दूर करने से शिक्षा का स्तर सुधरेगा और बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी।

गौरव त्रिपाठी ने कहा कि शहर के राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज का हाल बेहाल है। शिक्षकों की कमी के कारण पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।

सरयू प्रसाद ने कहा कि शहर के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में भी पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। यहां करीब 1500 छात्राएं हैं। शिक्षकों की कमी दूर की जानी चाहिए।

शासन को भेजी गई शिक्षकों की कमी की जानकारी

जिला विद्यालय निरीक्षक ओमप्रकाश राणा के अनुसार, राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के संबंध में शासन को जानकारी दी जा चुकी है।

विद्यालयों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति होने से न केवल पठन-पाठन व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि विद्यार्थियों को विषयवार नियमित शिक्षा भी मिल सकेगी।

फिलहाल जिले के राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों को भरना एक बड़ी आवश्यकता बन गया है। अभिभावकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि शासन जल्द आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो।

राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी

Rating: 4.5
Diposkan Oleh:
UP UPDATEMART

Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA

Leave a Comment

WordPress Emporium Samui – Gutenberg WordPress Theme for Blog and Magazine Sanat – Industry Elementor Template Kit Sandbox – Modern & Multipurpose WordPress Theme SanFair – Blog Magazine Elementor Template Kit SanFrancisco – MultiConcept Blog & Magazine WordPress Theme Sanito – Sanitizing and Cleaning WordPress Theme SanJose – Landing Page Santoni – Blog & Magazine Elementor Template Kit Sanubari – Travel & Tour Agency Elementor Template Kit Sanzo | Responsive WooCommerce WordPress Theme