● 50% से कम और 90% से ज्यादा अंक देने पर स्पष्टीकरण जरूरी
● कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों के लिए रिमेडियल कक्षाएं अनिवार्य
प्रयागराज, । इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) परीक्षा को लेकर अहम बदलाव किया गया है। अब यदि किसी विद्यार्थी को 50% से कम या 90% से अधिक अंक दिए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक को इसका स्पष्ट औचित्य (जस्टिफिकेशन) देना होगा। यह निर्णय हाल ही में कुलपति की अध्यक्षता में हुई कार्य परिषद की बैठक में लिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इस नए नियम का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। इसके साथ ही जिन विद्यार्थियों को कम अंक मिलते हैं, उनके लिए अनिवार्य रूप से रिमेडियल (सुधारात्मक) कक्षाएं भी चलाई जाएंगी, ताकि उनकी पढ़ाई में सुधार हो सके। नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) लागू होने के बाद विश्वविद्यालय में परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव किए गए हैं। अब आंतरिक मूल्यांकन (सेशनल/सीआईए) को भी अनिवार्य किया गया है। स्नातक स्तर पर विद्यार्थियों को पहले दो वर्षों में दो मेजर और एक माइनर विषय पढ़ना होगा, जबकि तीसरे वर्ष में केवल मेजर विषयों पर फोकस रहेगा।
लचीली पुनः परीक्षा प्रणाली
अगर कोई विद्यार्थी किसी विषय में फेल हो जाता है या परीक्षा में शामिल नहीं हो पाता तो उसे पूरा सेमेस्टर दोबारा नहीं पढ़ना होगा। वह केवल उसी विषय की पुनः परीक्षा दे सकेगा। पहले से मिले आंतरिक अंक भी सुरक्षित रहेंगे। इससे छात्र-छात्राओं का समय और मेहनत दोनों बचेंगे।
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