अब बीमा कंपनियों को दावा आवेदन प्राप्त होने के बाद तय समय-सीमा के अंदर निपटान करना होगा। इरडा के नए निर्देशों के तहत बीमा कंपनियों के लिए अनिवार्य किया गया है कि अब हर 15, 30 और 60 दिन (तीन चरणों) के अंदर दावा निपटान से जुड़ा ब्यौरा मुहैया कराए। इतना ही नहीं, अगर कोई ग्राहक पॉलिसी में पता या नॉमिनी बदलवाना चाहता है तो सात दिन में प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
हाल ही में आईआरडीएआई ने बीमा कंपनियों को लेकर नए निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें बीमा कंपनियों के एमडी और सीईओ स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है। उनके वेतन और बोनस को दावा निपटान की स्थिति से जोड़ दिया गया है। दावा निपटान में देरी को लेकर मिल रही शिकायतों के बीच नए नियम बनाए गए हैं। दरअसल, आईआरडीएआई के पास ऐसी शिकायतों की भरमार है, जिसमें ग्राहकों को बीमा कंपनियां दावा धनराशि जारी करने में बार-बार चक्कर कटाती हैं।
नए नियमों के तहत अब तय किया गया है कि बीमा कंपनियों के बड़े अधिकारियों को मिलने वाला बोनस और अतिरिक्त वेतन (वेरिएबल पे) इस बात पर निर्भर करेगा कि उनकी कंपनी ग्राहकों को कितनी अच्छी और पारदर्शी सेवा दे रही है। अधिकारियों के परफॉर्मेंस को आंकने के लिए कुल 50 फीसदी नंबर (वेटेज) का आकलन बीमा विनियामक द्वारा निर्धारित मानकों पर किया जाएगा। इतना ही नहीं, कंपनियां अपनी वेबसाइट पर पूरी जानकारियां सही तरीके से नहीं दिखाती हैं तो उनके बड़े अधिकारियों के बोनस और अतिरिक्त वेतन पर रोक लगाई जा सकती।
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