एकीकृत पेंशन स्कीम (यूपीएस) को लेकर महाराष्ट्र के बाद अब अन्य राज्य भी जल्द फैसला ले सकते हैं। भाजपा शासित राज्य यूपीएस को लागू करने की तैयारी में हैं, तो वहीं विपक्षी दल शासित राज्यों में यूपीएस की तर्ज पर दूसरी स्कीम का ऐलान किया जा सकता है या फिर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को कुछ संशोधनों के बाद लागू किया जा सकता है।
सूत्रों की मानें तो वो राज्य सबसे पहले यूपीएस को लागू करने जा रहे हैं, जहां जल्द चुनाव की घोषणा हो सकती है। इस लिहाज से झारखंड और बिहार में सबसे पहले फैसला लिया जा सकता है। बताया जा रहा है, केंद्र की तरफ से वित्त मंत्रालय यूपीएस को लेकर राज्यों के साथ समन्वय कर रहा है। खासकर वो राज्य, जहां वर्तमान में भाजपा और राजग में शामिल दलों की सरकार है। उन सभी राज्यों में यूपीएस को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गया है। कुछ राज्यों के साथ यूपीएस से जुड़ी मॉडल साझा किया गया है। इनकी ओर से अपने स्तर पर आकलन भी हो रहा है।
इसमें पता हो रहा है कि स्कीम लागू होने पर कितने कर्मियों को लाभ होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था पर कितना भार पड़ेगा।
एनपीएस से जुड़े 23 लाख कर्मी यूपीएस चुन सकेंगे
केंद्र की एकीकृत पेंशन योजना चुनने का विकल्प एनपीएस से जुड़े 23 लाख से अधिक सरकारी कर्मियों के पास है। इसमें सेवानिवृत्त कर्मी भी शामिल हैं। कर्मियों को 25 वर्ष की न्यूनतम योग्यता सेवा होने पर सेवानिवृत्ति से पहले के आखिरी 12 माह में उनके औसत मूल वेतन का 50 पेंशन की गारंटी दी गई है।
पुरानी पेंशन में भी केंद्र, राज्यों पर था दबाव
वित्तिय भार बढ़ने की वजह से ही केंद्र और राज्य सरकारों ने पुराने पेंशन योजना से हाथ खींचा था। इसको लेकर रिजर्व बैंक समेत अन्य संस्थाओं ने भी चेताया था। 1990-91 में केंद्र का पेंशन पर खर्च 3,272 करोड़ था, जो 2020-21 तक करीब 58 गुना बढ़क
र 1,90,886 करोड़ हो गया।
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