UP News: यूपी के 1.70 लाख से अधिक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा, कैबिनेट ने दी मंजूरी
उत्तर प्रदेश के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश के बेसिक, माध्यमिक और संस्कृत शिक्षा विभाग में कार्यरत 1,70,366 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी गई।
इस फैसले के बाद पात्र कर्मचारी सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में भी निर्धारित शर्तों के अनुसार बिना नकद भुगतान किए अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करा सकेंगे।
सरकार देगी 51.11 करोड़ रुपये का सालाना प्रीमियम
अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के अनुसार, इस योजना के लिए राज्य सरकार प्रति कर्मचारी प्रतिवर्ष 3,000 रुपये का प्रीमियम वहन करेगी। योजना के संचालन पर सरकार को सालाना लगभग 51.11 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।
इस योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (SACHIS) के माध्यम से किया जाएगा। इसके तहत अस्पताल में भर्ती होकर कराए जाने वाले उपचार यानी इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट (IPD) की सुविधा मिलेगी। उपचार आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की निर्धारित दरों के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग के 1.22 लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि इस निर्णय से बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े कुल 1,22,304 शिक्षणेत्तर कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
इनमें परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों, वित्तविहीन विद्यालयों और समग्र शिक्षा परियोजना में कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार लगभग 36.69 करोड़ रुपये का वार्षिक प्रीमियम वहन करेगी।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर बेसिक शिक्षा परिवार को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस घोषणा को लागू करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
माध्यमिक और संस्कृत शिक्षा के 48,062 कर्मचारियों को भी फायदा
इस योजना का लाभ माध्यमिक एवं संस्कृत शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी मिलेगा। माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और संस्कृत महाविद्यालयों में कार्यरत 48,062 शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस सुविधा के दायरे में आएंगे।
इन कर्मचारियों के लिए सरकार लगभग 14.42 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष खर्च करेगी।
योजना के अंतर्गत पात्र कर्मचारियों और उनके आश्रित परिजनों को सरकारी अस्पतालों तथा SACHIS से संबद्ध निजी अस्पतालों में निर्धारित दरों के अनुसार कैशलेस IPD उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?
कैबिनेट के इस फैसले से शिक्षा विभाग के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके परिवारों को अस्पताल में भर्ती होकर इलाज कराने के दौरान आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। सरकारी अस्पतालों के अलावा योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में भी निर्धारित नियमों के अनुसार कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी।
नोट: कैशलेस उपचार का लाभ योजना की पात्रता, निर्धारित दरों और लागू नियमों के अधीन होगा। अस्पतालों में भर्ती हुए बिना कराए जाने वाले सामान्य ओपीडी उपचार को इस घोषणा के आधार पर स्वतः शामिल नहीं माना जाना चाहिए।
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