बदलाव : एक तारीख से ट्रेनों की प्रतीक्षा टिकट सूची छोटी होगी – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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नई दिल्ली। ट्रेनों के एसी व स्लीपर कोच में प्रतीक्षा टिकट वाले यात्रियों की भारी भीड़ के चलते आम मुसाफिरों को होने वाली परेशानी से निजात दिलाने के लिए रेलवे बोर्ड ने नीतिगत और ठोस तकनीकी सुधार लागू किया है।

इसके तहत ट्रेनों की प्रतीक्षा सूची (प्रतीक्षा टिकट में सीमा) छोटी की जाएगी जिससे आरक्षित बर्थ पर यात्री सुकून से यात्रा कर सकेंगे। सोशल मीडिया में आए दिन कोच की गैलरी, दरवाजे व शौचालय में सफर कर रहे यात्रियों के वीडियो व संबंधित शिकायतों को देखते हुए रेलवे ने कदम उठाया है। यह व्यवस्था एक जून 2026 के बाद से बनने वाले आरक्षण चार्ट में लागू हो जाएगी।रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरक्षण प्रणाली में प्रतीक्षा टिकट की बुकिंग पर कैपिंग की जा रही है। अब किसी ट्रेन में 300 या 400 तक लंबी प्रतीक्षा सूची जारी नहीं की जाएगी, बल्कि एक तय सीमा पर पहुंचते ही सॉफ्टवेयर स्वचालित तरीके से टिकटों की बुकिंग बंद कर देगा और यात्रियों को जगह उपलब्ध नहीं दिखाई देने लगेगा। उन्होंने बताया कि स्लीपर क्लास में 400 और थर्ड एसी जैसी श्रेणियों में 300 तक प्रतीक्षा टिकट बुक होते हैं। इससे त्योहारों के समय ट्रेनों के भीतर पैर रखने की जगह नहीं बचती थी। नए नियम में एसी 1,2, 3 व चेयरकार श्रेणियों में उपलब्ध कुल कंफर्म सीटों का अधिकतम 60 प्रतिशत तक ही प्रतीक्षा टिकट जारी किए जाएंगे। वहीं, स्लीपर श्रेणी में कुल क्षमता का अधिकतम 30 प्रतिशत ही प्रती₹क्षा सीमा तय की गई है।

इस बार सबसे ज्यादा समर स्पेशल ट्रेनें चलाईं

यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने इस बार सबसे ज्यादा समर स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। 15 अप्रैल से 15 जुलाई के बीच रिकॉर्ड 908 विशेष ट्रेनें चला रहा है, जो कुल 18,262 फेरे लगा रही हैं। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 47 फीसदी अधिक है।

केवल 25 फीसदी का नियम वापस हो चुका

रेलवे ने पिछले दिनों सख्त कदम उठाते हुए सभी क्लास में केवल 25 प्रतिशत प्रतीक्षा टिकट का नियम लागू किया था जिससे बुकिंग काउंटरों पर जगह उपलब्ध नहीं बढ़ गई और यात्रियों की भारी असुविधा को देखते हुए बोर्ड ने इस फैसले की समीक्षा नियम को वापस ले लिया।

केवल 20 से 25% टिकट ही हो रहे कन्फर्म

रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि चार्ट बनने तक प्रतीक्षा सूची के केवल 20 से 25 फीसदी टिकट ही कन्फर्म हो पाते हैं। यानी अधिकांश यात्रियों को या तो वेटिंग टिकट के साथ यात्रा रद्द करनी पड़ती है या फिर दूसरी व्यवस्था करनी पड़ती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय से असीमित बुकिंग व्यवस्था का फायदा टिकट दलाल उठा रहे थे। वे बड़ी संख्या में प्रतीक्षा टिकट बुक करा लेते थे और बाद में टिकट कन्फर्म कराने का भरोसा देकर यात्रियों से अतिरिक्त रकम वसूलते थे। इससे आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। नए प्रावधानों के तहत प्रतीक्षा टिकट पर यात्री को स्लीपर या एसी कोच में यात्रा करने की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई यात्री नियम तोड़ते हुए ऐसे कोच में सफर करता पाया गया तो टीटीई उस पर जुर्माना लगाएगा।

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