बुलंदशहर। आयोग से बर्खास्त किए गए शिक्षक अमित गिरी के इंटरमीडिएट को छोड़कर सभी शैक्षिक दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं। उन्होंने हापुड़ जिले की मोनार्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक की मार्कशीट भी नौकरी प्राप्त करने के लिए लगाई थी। उन्हें सबसे पहले आजमगढ़ के राजकीय स्कूल में तैनाती मिली थी। अब वह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मड़ौना जाफराबाद में तैनात थे।
जिला विद्यालय निरीक्षक विनय कुमार ने बताया कि शिक्षा निदेशक माध्यमिक कार्यालय से जो रिपोर्ट भेजी गई है, उसमें अमित गिरी ने संपूर्णानंद विश्वविद्यालय वाराणसी की हाईस्कूल की फर्जी मार्कशीट लगाई है। जांच में खुलासा हुआ कि इसमें अनुक्रमांक वही है और नाम किसी दूसरे छात्र का है। हापुड़ की मोनार्ड यूनिवर्सिटी की स्नातक की डिग्री है। इसमें प्रथम वर्ष 201-11, द्वितीय सत्र 2011-12 व तृतीय सत्र 2012-13 दर्शाया गया है लेकिन मार्कशीट में नंबर वेरीफाई नहीं किए हैं, जो फर्जीवाड़े की श्रेणी में है।
बीएड की मार्कशीट मध्य प्रदेश के श्रीसत्य साई विवि सरोहर कॉलेज की है। इसमें भी प्राप्तांक व पूर्णांक का सत्यापन नहीं दिया गया है। कई बार विवि से पत्राचार किया गया था लेकिन वहां से यही सत्यापन रिपोर्ट मिली, जिसके आधार पर नियुक्ति निरस्त हुई है।
इंटरमीडिएट की मार्कशीट जांच में सही पाई गई है, जो यूपी बोर्ड से संबंधित है। आजमगढ़ मंडल के जिलों में वर्ष 2015-16 में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षत स्नातक (एलटी ग्रेड) की भर्ती हुई थी। इसमें बुलंदशहर निवासी अमित गिरि का चयन सहायक अध्यापक में सामाजिक विज्ञान पद पर हुआ था। आयोग द्वारा शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच कराई गई तो वह फर्जी निकले हैं।
मंडल में 22 शिक्षक जांच के दौरान फर्जी मिले हैं। इसमें अमित गिरी भी शामिल हैं। आयोग ने अमित की सेवा समाप्त कर उनके खिलाफ डीआईओएस को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। डीआईओएस ने बताया कि प्रधानाचार्य को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश कर दिए हैं, जल्द शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए वेतन की रिकवरी कराई जाएगी।
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